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CBD बेलापुर:6 दिन से सड़क पर पड़ा ग्रीन वेस्ट,जिम्मेदार कौन?

Tree Pruning Done, But Green Waste Adds to the Trouble

नवी मुंबई/सान्वी दशपांडे : नवी मुंबई को देश के सबसे व्यवस्थित और ग्रीन शहरों में गिना जाता है। लेकिन इस मानसून ने नगर निगम के दावों की परतें उधेड़कर रख दी हैं। तेज बारिश और हवा के साथ शहरभर में सैकड़ों पेड़ गिरे, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि नगर निगम की तैयारी, योजना और जवाबदेही भी धराशायी हो गई। CBD बेलापुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां पेड़ों की छंटाई से निकला ग्रीन वेस्ट पिछले छह दिनों से सड़कों, फुटपाथों और नालियों के किनारे पड़ा हुआ है। बारिश के बीच यह हरित कचरा सिर्फ शहर की बदसूरती नहीं बढ़ा रहा, बल्कि पैदल यात्रियों, वाहन चालकों और जल निकासी व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

क्यों विफल हो रही है महानगर पालिका कि तयारीया

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मानसून हर साल तय समय पर आता है, फिर भी महानगर पालिका हर साल तैयारी में क्यों विफल रहता है? प्री-मानसून सीजन में वैज्ञानिक तरीके से पेड़ों का सर्वे, कमजोर शाखाओं की समय पर छंटाई और ग्रीन वेस्ट के तत्काल निस्तारण की योजना क्यों नहीं बनाई गई?

यदि CBD बेलापुर में समय रहते पेड़ों की वैज्ञानिक छंटाई की गई होती, तो कई पेड़ गिरने से बच सकते थे। लेकिन प्रशासन तब सोता रहा और अब नुकसान होने के बाद जल्दबाजी में पेड़ों की कटाई कर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रहा है। यह संकट प्रबंधन नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता की स्वीकारोक्ति है।

इससे भी अधिक शर्मनाक यह है कि छंटाई के बाद निकला हरित कचरा हटाने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय उसे सड़क किनारे छोड़ दिया गया। यानी एक समस्या का समाधान करते-करते प्रशासन ने दूसरी समस्या पैदा कर दी। बारिश में यही टहनियां नालियां जाम करेंगी, जलभराव बढ़ाएंगी और दुर्घटनाओं का कारण बनेंगी। CBD बेलापुर के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्या छह दिनों से सड़क पर पड़े ग्रीन वेस्ट पर किसी जनप्रतिनिधियों की नजर नहीं पड़ी? यदि पड़ी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता ने प्रतिनिधि इसलिए नहीं चुने कि वे सिर्फ उद्घाटन और फोटो तक सीमित रहें। उनकी जिम्मेदारी नागरिक समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना भी है।

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केवल सफाई अभियान चलाने से नहीं चलेगा काम

प्रशासन की जिम्मेदारी केवल पेड़ काटने या छंटाई करने तक सीमित नहीं है। छंटाई के तुरंत बाद हरित कचरा हटाना, नालों को साफ रखना और पूरे अभियान की निगरानी करना भी उतना ही जरूरी है। यदि विभागों के बीच समन्वय नहीं होगा, तो हर मानसून में यही अव्यवस्था दोहराई जाएगी। महानगरपालिका को अब केवल सफाई अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा। वैज्ञानिक ट्री मैनेजमेंट, समयबद्ध प्री-मानसून योजना, जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और 24 घंटे के भीतर ग्रीन वेस्ट हटाने की अनिवार्य नीति लागू करनी होगी।

हर बार प्रकृति को दोष देकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। पेड़ गिरना प्राकृतिक घटना हो सकती है, लेकिन समय पर तैयारी न करना, वैज्ञानिक नियमों की अनदेखी करना और नुकसान के बाद भी जवाबदेही तय न करना पूरी तरह प्रशासनिक विफलता है।

अब सवाल केवल पेड़ों का नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली का है। यदि व्यवस्था समय रहते नहीं जागी, तो हर मानसून में नागरिकों को इसी लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी।

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