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NMMT की करोड़ों की ई-बसें, लेकिन सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

NMMT ki crores ki e-buses, but who will guarantee safety?

नवी मुंबई/सान्वी दशपांडे : नवी मुंबई म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट (NMMT) के तुर्भे डिपो में सोमवार रात एक 9 मीटर की JBM इलेक्ट्रिक बस में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। यह बस पिछले चार दिनों से डिपो में खड़ी थी। रात करीब 8:30 बजे बस से धुआं निकलना शुरू हुआ और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलते ही वाशी फायर स्टेशन की दो दमकल गाड़ियां और 14 कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। वाशी फायर स्टेशन के प्रमुख रोहन कोकाटे ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल दल मौके पर पहुंचा और आसपास खड़ी अन्य बसों तक आग फैलने से रोक दिया गया। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है और मामले की जांच जारी है।

पहले भी बस में लगी थी आग

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही घनसोली डिपो में भी JBM कंपनी की 9 मीटर इलेक्ट्रिक बस में आग लगने की घटना सामने आई थी। उस हादसे में भी बस पूरी तरह जल गई थी। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई थी, लेकिन अब तक अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

NMMT Turbhe Depot Fire: JBM Electric Bus Catches Fire Again
NMMT Turbhe Depot Fire: JBM Electric Bus Catches Fire Again

परिवहन तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

JBM की 9 मीटर इलेक्ट्रिक बस में लगी आग केवल एक वाहन के जलने की घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे सार्वजनिक परिवहन तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राहत की बात है कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि यही आग किसी व्यस्त मार्ग पर यात्रियों से भरी बस में लगती, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि कुछ ही दिनों के भीतर इसी कंपनी की दूसरी इलेक्ट्रिक बस आग की चपेट में आई है। पहली घटना की जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई और दूसरी घटना सामने आ गई। ऐसे में केवल तकनीकी जांच की औपचारिक घोषणा पर्याप्त नहीं है। जनता जानना चाहती है कि आखिर गलती कहाँ है—बैटरी में, चार्जिंग सिस्टम में, रखरखाव में या गुणवत्ता नियंत्रण में?

सरकार लगातार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ाया जा रहा है, लेकिन यदि सुरक्षा मानकों का कठोर पालन नहीं होगा, तो हर नई बस लोगों में विश्वास नहीं, बल्कि डर पैदा करेगी। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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राज्य सरकार, परिवहन विभाग और NMMT प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन बसों का मेंटेनेंस किस मानक के अनुसार हो रहा है। बैटरी हेल्थ की नियमित जांच कितनी बार होती है? चार्जिंग स्टेशन कितने सुरक्षित हैं? बसों का थर्मल मॉनिटरिंग सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं? यदि इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं हैं, तो यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता भी मानी जाएगी।

JBM की कई इलेक्ट्रिक बसें लगातार तकनीकी खराबिया

चिंता का विषय यह भी है कि परिवहन क्षेत्र में चर्चा है कि JBM की कई इलेक्ट्रिक बसें लगातार तकनीकी खराबियों के कारण पहले से ही सेवा से बाहर हैं। यदि यह जानकारी सही है, तो संबंधित एजेंसियों को तत्काल सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए। जनता का विश्वास पारदर्शिता से ही लौटेगा, गोपनीयता से नहीं।

विडंबना यह है कि दो दिन पहले ही 51 नई CNG बसों का महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने उद्घाटन कर सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित और मजबूत बनाने का संदेश दिया। लेकिन उसी परिवहन तंत्र में बार-बार इलेक्ट्रिक बसों में आग लगना यह संकेत देता है कि आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ-साथ उसकी निगरानी और जवाबदेही भी उतनी ही आधुनिक होनी चाहिए।

अब समय केवल विभागीय जांच का नहीं, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट का है। सभी इलेक्ट्रिक बसों की बैटरी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, फायर सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की थर्ड-पार्टी जांच कराई जानी चाहिए। यदि किसी कंपनी की निर्माण गुणवत्ता या रखरखाव में कमी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

सार्वजनिक परिवहन नागरिकों का भरोसा होता है। सरकार का दायित्व केवल नई बसें खरीदना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि हर बस यात्रियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो। हर आग के बाद जांच और हर जांच के बाद खामोशी अब स्वीकार्य नहीं है। इस बार सरकार को जवाब देना होगा, जिम्मेदारी तय करनी होगी और ऐसा सुरक्षा मॉडल विकसित करना होगा जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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