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10 Years of UPI: डिजिटल क्रांति की कहानी

10 Years of UPI: The Story of a Digital Revolution

नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : भारत का डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 11 अप्रैल को अपने सफल 10 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ष 2016 में लॉन्च हुआ यह सिस्टम आज देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। मोबाइल आधारित इस रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम ने बैंकिंग और लेनदेन की प्रक्रिया को सरल, तेज़ और सुरक्षित बनाया है। एनालिटिक्स फर्म Tracxn के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में UPI के जरिए 218.98 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 285 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह आंकड़े न केवल इसकी लोकप्रियता को दर्शाते हैं, बल्कि भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर भी संकेत करते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान UPI का उपयोग अभूतपूर्व रूप से बढ़ा। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के चलते लोगों ने कैशलेस ट्रांजैक्शन को प्राथमिकता दी, जिससे UPI आम नागरिकों से लेकर छोटे व्यापारियों तक के लिए सबसे सुविधाजनक माध्यम बन गया।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार, मार्च 2026 में UPI ने अपने लॉन्च के बाद से अब तक का सबसे अधिक मासिक लेनदेन दर्ज किया, जो इसकी निरंतर बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। आज UPI का इस्तेमाल किराना दुकानों, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल भुगतान, टैक्सी किराया और यहां तक कि छोटे-छोटे दैनिक खर्चों में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि UPI ने वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को भी मजबूत किया है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ी है, जिससे बैंकिंग सेवाएं पहले से अधिक सुलभ हुई हैं।
UPI की सफलता ने भारत को वैश्विक स्तर पर डिजिटल पेमेंट इनोवेशन के अग्रणी देशों में शामिल कर दिया है। आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
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