
NMMC यूनिफॉर्म वितरण में देरी, शिक्षा विभाग पर सवाल
Delay in NMMC Uniform Distribution Raises Questions About Education Department
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ महीना बीत चुका है। 15 जुलाई तक सभी विद्यार्थियों को नई स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। इसके बाद स्थायी समिती द्वारा दिए गए अतिरिक्त आठ दिन भी बीत गए, लेकिन नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) के कई स्कूलों के विद्यार्थियों को अब तक नई यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी है। इसे लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वहीं प्रशासन पर ठेकेदार के प्रति नरम रवैया अपनाने के आरोप भी लग रहे हैं।
महानगरपालिका के 52 स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 48,200 विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का ठेका मेसर्स मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिया गया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार स्कूल खुलने से पहले सभी विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म मिल जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। शिक्षा विभाग का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया और कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी होने में हुई देरी के कारण वितरण प्रभावित हुआ।

महासभा में भी गूंजा था मुद्दा
यूनिफॉर्म वितरण में देरी का मुद्दा पिछले महीने हुई महानगरपालिका की महासभा में भी जोर-शोर से उठा था। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) के नगरसेवकों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए इसे विद्यार्थियों के साथ अन्याय बताया था। इसके बाद शिक्षा विभाग के उप आयुक्त संघरत्न खिल्लेरे ने 15 जुलाई तक सभी विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म वितरित करने का आश्वासन दिया था। हालांकि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी वितरण कार्य पूरा नहीं हो सका।
स्थायी समिती ने भी जताई नाराजगी
शुक्रवार को स्थायी समिती की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष अशोक पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि कुछ स्कूलों में अभी भी यूनिफॉर्म वितरण का कार्य जारी है और सभी विद्यार्थियों तक यूनिफॉर्म नहीं पहुंची है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि कितने विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म मिल चुकी है, कितने अब भी प्रतीक्षा कर रहे हैं, ठेकेदार को कितने नोटिस जारी किए गए हैं और उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किस चरण में है।
प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष के बीच मतभेद
जब शिक्षा विभाग के उप आयुक्त संघरत्न खिल्लेरे से इस विषय में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि महापौर की अनुमति के बिना मीडिया को कोई जानकारी देने के निर्देश थे। वहीं महापौर सुजाता पाटिल ने इस दावे का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था। महापौर की ओर से जानकारी देने की अनुमति मिलने के बाद भी शिक्षा विभाग ने तत्काल आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए। इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया कि विभाग के पास यूनिफॉर्म वितरण का अद्यतन और पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं।
नए विद्यार्थियों को प्राथमिकता
उप आयुक्त संघरत्न खिल्लेरे ने कहा कि पिछले वर्ष विद्यार्थियों को दो-दो यूनिफॉर्म दी गई थीं, इसलिए अधिकांश विद्यार्थियों को फिलहाल अधिक परेशानी नहीं हो रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि नए प्रवेश लेने वाले कई विद्यार्थियों को अभी तक यूनिफॉर्म नहीं मिली है और ऐसे विद्यार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर यूनिफॉर्म वितरित की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ठेका शर्तों का पालन नहीं करने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह नहीं बताया कि सभी विद्यार्थियों को नई यूनिफॉर्म कब तक उपलब्ध करा दी जाएगी।
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अभिभावकों में नाराजगी
कई अभिभावकों का कहना है कि कुछ विद्यार्थियों को केवल पी.टी. (फिजिकल एजुकेशन) यूनिफॉर्म या मानसून सामग्री ही मिली है, जबकि नियमित स्कूल यूनिफॉर्म का पूरा सेट अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके कारण अनेक विद्यार्थियों को पुरानी यूनिफॉर्म या सामान्य कपड़ों में स्कूल जाना पड़ रहा है।
राजनीतिक रूप लेता विवाद
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरा है। पार्टी के शहर अध्यक्ष गजानन काले ने आरोप लगाया कि 15 जुलाई की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म उपलब्ध न कराना प्रशासन की गंभीर लापरवाही है। उन्होंने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और सभी विद्यार्थियों को शीघ्र यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो मनसे आंदोलन तेज करेगी।
अतिरिक्त मोहलत खत्म फिर भी हजारों विद्यार्थी यूनिफॉर्म के इंतजार में
शिक्षा सत्र शुरू हुए डेढ़ महीना बीत चुका है, समय-सीमाएं समाप्त हो चुकी हैं और अतिरिक्त मोहलत भी खत्म हो गई है। इसके बावजूद यदि हजारों विद्यार्थी अब भी नई यूनिफॉर्म का इंतजार कर रहे हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि महानगरपालिका प्रशासन कब तक सभी विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराता है और ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।



