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Swatantryaveer Savarkar: स्वतंत्रता संग्राम का तेजस्वी अध्याय

Swatantryaveer Savarkar: A Brilliant Chapter in the Freedom Struggle

नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक उज्ज्वल अध्याय माने जाने वाले महान क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर की आज पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें कृतज्ञता के साथ याद किया गया। राष्ट्रवादी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को स्मरण किया।

बचपन से ही क्रांति की चिंगारी

28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में जन्मे सावरकर बचपन से ही प्रखर देशभक्त थे। उन्होंने कम आयु में ही विदेशी शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत कर दी थी। युवावस्था में उन्होंने संगठन बनाकर युवाओं में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशक्त विचारधारा प्रस्तुत की।

अंडमान की कालकोठरी से अमर विचार

ब्रिटिश सरकार ने उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों को गंभीर अपराध मानते हुए उन्हें अंडमान की कुख्यात सेल्युलर जेल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कालकोठरी में उन्हें अमानवीय यातनाएं, कठोर श्रम, भूख और एकांत का सामना करना पड़ा, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनका मनोबल कभी नहीं टूटा और वे लगातार देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहे।

त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक सावरकर

सावरकर केवल क्रांतिकारी ही नहीं बल्कि महान विचारक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। उनकी पुस्तकों “हिंदुत्व” और “1857 चे स्वातंत्र्य समर” ने स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार दिया। उन्होंने समाज में व्याप्त जाति-भेद, छुआछूत और अंधविश्वास के विरुद्ध खुलकर आवाज उठाई। 26 फरवरी 1966 को उन्होंने देह त्याग किया, लेकिन उनके विचार आज भी समाज को प्रेरणा देते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर देशवासियों ने उनके त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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