
Jinjis’s: की एंट्री और ‘मिनी न्यूयॉर्क’ बना खारघर
Jinjis's \ entry makes Kharghar a 'mini New York'
नवी मुंबई ; तुषार पाटील — खारघर स्थित Loud Park में 22 और 23 नवंबर 2025 को आयोजित Rolling Loud India हिप-हॉप फेस्टिवल भले ही ग्लैमर और भव्यता के कारण सुर्खियों में रहा हो, लेकिन दो दिनों का यह शो शहर के लिए परेशानी और युवा पीढ़ी पर इसके विपरीत प्रभावों को लेकर अधिक चर्चा में रहा। Central Cee, Wiz Khalifa, Karan Aujla और Don Toliver जैसे कलाकारों की उपस्थिति से मंच जरूर जगमगा उठा, मगर कार्यक्रम के सामाजिक परिणामों ने कहीं ज्यादा गंभीर सवाल खड़े किए। टिकटें “District by Zomato” ऐप पर बेची गईं और JioHotstar पर इसका लाइव प्रसारण हुआ—लेकिन आयोजन की चमक-धमक से ज्यादा, इससे पैदा हुई समस्याओं ने शहर का ध्यान खींचा। कहां जा रहा है कि इस कंसर्ट की टिकट लोगों को मिलना मुश्किल हो रहा था
जिंजीस और उनके क्रू की एनर्जी, तेज लाइट्स, शोरगुल करती भीड़ और इन्फ्लुएंसर्स का जमावड़ा—इन सबने माहौल को ऐसा बना दिया कि कई लोगों ने इसे “न्यू ईयर से पहले का न्यूयॉर्क” बताया। हालांकि, इस चमक के पीछे शहर का सुकून, अनुशासन और नागरिकों की सुविधा पूरी तरह दबकर रह गई—ऐसी आलोचना भी तेज़ी से सामने आई।
बेहद तेज आवाज और भारी भीड़ का झटका
रात देर तक गूंजते तेज संगीत ने खारघर के स्थानीय निवासियों को परेशान कर दिया। भीड़ और वाहतूक जाम की वजह से आम नागरिकों का सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा। लक्ज़री और दिखावे की झूठी दुनिया हिप-हॉप और इंटरनेट संस्कृति की नकली चमक और आलीशान जीवनशैली ने युवाओं में अनावश्यक दबाव बढ़ा दिया है।
कई अभिभावकों ने शिकायत की कि उनके बच्चे अब वास्तविक मेहनत के बजाय दिखावटी लाइफस्टाइल को ही सफलता मानने लगे हैं। प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं गर्दी, सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण में प्रशासन को भारी दबाव झेलना पड़ा। रहवासियों की दर्जनों शिकायतों ने आयोजन की योजना पर सवाल खड़े कर दिए। मनोरंजन की बदलती परिभाषा
समाजशास्त्रियों का कहना है कि बड़े आयोजनों में संगीत से ज्यादा “वीडियो बनाना” और “फेम पाना” प्राथमिकता बनती जा रही है, जो शहर की युवा संस्कृति के लिए चिंताजनक संकेत है।
हिप-हॉप संस्कृति और युवाओं पर बढ़ता दबाव
फेस्टिवल के बाद हिप-हॉप इंडस्ट्री की उथली और दिखावटी संस्कृति को लेकर सबसे ज्यादा आलोचना हुई। अत्यधिक ग्लैमर, महंगी पार्टियां, आक्रामक व्यवहार, स्टेटस का दिखावा और “इंटरनेट फेम” की अंधी दौड़—इन सबने युवाओं पर नकारात्मक असर डाला है, ऐसा अभिभावकों और विशेषज्ञों का कहना है।



