Bihar Election : आधी आबादी के सहारे बिहार में जीत की तैयारी-महिलाओं पर पार्टियों का बड़ा दांव
Battle for Bihar: ‘Half Population’ Emerges as the Key Decider, Parties Bet on Women Power

पटना-विशेष प्रतिनिधिः बिहार चुनाव में इस बार ‘आधी आबादी’ यानी महिलाएं बनी हैं सबसे बड़ा फैक्टर। महिला वोटर्स को लुभाने के लिए हर दल ने वादों की झड़ी लगा दी है। राजद (RJD) ने महिलाओं को टिकट देने में बाज़ी मारी है.अब तक सबसे ज़्यादा महिला उम्मीदवार राजद के मैदान में हैं। वहीं एनडीए और महागठबंधन दोनों ही महिला सशक्तिकरण के वादों के साथ ‘आधी आबादी’ का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं। महिलाओं के लिए रोज़गार, सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता इस चुनाव के मुख्य मुद्दों में शामिल हैं। अब देखने वाली बात होगी. बिहार की महिलाएं किसका साथ देंगी? क्या इस बार ‘आधी आबादी’ चुनाव का पूरा गणित बदल देगी. महागठबंधन हो या एनडीए सभी ने ‘नारी शक्ति संकल्प’ का नारा दिया है, जिसमें महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 50% आरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य में प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
महिलाओं को लुभाने , पार्टियों का वादा पर वादा
इस बार हर राजनीतिक दल की नज़र है ‘आधी आबादी’ यानी महिला मतदाताओं पर। बिहार की महिलाओं ने हमेशा वोटिंग में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है —और अब वे राजनीति की दिशा तय करने वाली ताकत बन चुकी हैं। बिहार के चुनावी रण में इस बार महिला मतदाता सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती हैं। ल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 49 फीसदी से ज़्यादा है, और कई सीटों पर महिला वोट ही जीत-हार का फैसला करेंगे। सीलिए हर दल ने इस बार ‘आधी आबादी’ को लुभाने के लिए वादों की झड़ी लगा दी है। एनडीए से लेकर महागठबंधन तक —हर कोई महिला सशक्तिकरण, रोजगार, सुरक्षा और शिक्षा की बातें कर रहा है। किन इन सबके बीच राजद (RJD) ने सबसे बड़ा दांव खेला है। हिलाओं को टिकट देने में राजद सबसे आगे निकल गई है . पार्टी ने कहा है — “अगर समाज में बदलाव चाहिए, तो महिलाओं को आगे लाना होगा।” दूसरी ओर एनडीए गठबंधन ने भी महिलाओं के लिए कई वादे किए हैं — स्वयं सहायता समूहों को मज़बूत करना, महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना, और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना जैसे एजेंडे पर फोकस है।
बड़ा सवाल-राजनीतिक वादों का क्या!
लेकिन सवाल ये है —क्या वादों से आगे बढ़कर राजनीतिक दल महिलाओं की वास्तविक भागीदारी बढ़ा पाएंगे? पटना से लेकर गया, भागलपुर और मधुबनी तक महिलाएं कह रही हैं. “अब सिर्फ़ वादों से नहीं, काम से भरोसा बनेगा।” कुछ महिलाओं ने कहा कि वे“रोजगार और सुरक्षा” को सबसे बड़ा मुद्दा मानती हैं। बिहार की राजनीति में अब महिलाओं की आवाज़ अनसुनी नहीं की जा सकती। जो दल ‘आधी आबादी’ का भरोसा जीत लेगा, वही तय करेगा सत्ता की कुर्सी किसके पास जाएगी।



