‘त्रिधारा’ में सुरों का जादू, रसिक हुए मंत्रमुग्ध
Magic of Melodies at ‘Tridhara’, Music Lovers Mesmerized
कोथरूड, पुणे: ऋत्विक फाउंडेशन फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा आयोजित विशेष संगीत कार्यक्रम ‘त्रिधारा’ में तीन पीढ़ियों के कलाकारों ने अपने सुरों का जादू बिखेरा और रसिक दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम में किराना घराने के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ गायक पंडित कैवल्यकुमार गुरव, ग्वाल्हेर-आग्रा घराने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे मुकुल कुलकर्णी, और युवा पीढ़ी के प्रतिभाशाली शास्त्रीय गायक अभेद अभिषेकी ने शानदार प्रस्तुति दी।कार्यक्रम की शुरुआत अभेद अभिषेकी ने राग पुरिया धनश्री की बंदिश ‘बल बल जाऊ मीत मोरे’ और ‘पायलिया झनकार मोरी’ से की। उनके मधुर और सुमधुर स्वर ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में तबला पर कौस्तुभ स्वैन, संवादिनी पर माधव लिमये, और तानपुरा व सहगायन में चिन्मय कुलकर्णी व ऋचा कुलकर्णी ने सुरेल साथ प्रदान किया।कार्यक्रम के मध्यांतर में ग्वाल्हेर-आग्रा घराने के मुकुल कुलकर्णी ने राग श्यामकल्याण की बंदिश ‘जियो मोरे लाल’, ‘ऐसो तुम्हीको मै’ और पारंपरिक दादरा ‘आन बान जिया मे लागे’ प्रस्तुत की। उनके नाजुक और प्रवाहपूर्ण सुरों ने दर्शकों को मोहित कर दिया। साथ में तबला पर वेदांग क्षीरसागर, संवादिनी पर आशिष कुलकर्णी, तानपुरा व सहगायन में कुणाल भिडे व कन्हैया बाहेती ने सटीक साथ दिया।कार्यक्रम का समापन किराना घराने के विख्यात गायक पंडित कैवल्यकुमार गुरव की मैफली से हुआ। उन्होंने राग मारुबिहागमधील बंदिश ‘अब मे हू न जानू’, ‘तरपत रैना दिन’, और ‘छेडो ना मोहे’ प्रस्तुत की। दर्शकों के आग्रह पर उन्होंने ‘मै तोरी ना मानुंगी बतिया’, राग दुर्गा की ‘तू रस कान्हा रे’ और ‘अजहू न आयिल पिया मोरा रे’ जैसी बंदिशें भी सुमधुर अंदाज में पेश की। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक भैरवी की बंदिश ‘अकेली जी न जय्यो राधा जमुना के तीर’ से हुआ।
इस अद्भुत प्रस्तुति में तीन सप्तकों में सहज घूमता हुआ स्वर, पकड़ और मधुरता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों का सत्कार ऋत्विक फाउंडेशन की संचालिका चेतना कडले, सुप्रसिद्ध सरोद वादक अनुपम जोशी और प्रसिद्ध गायिका सुमन नागरकट्टी ने किया। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन अरविंद देशपांडे ने किया।



