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नवी मुंबई में हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड: महिला से लूटे 1.81 करोड़ रुपये

High-profile cyber fraud in Navi Mumbai: Woman robbed of Rs 1.81 crore

नवी मुंबई: नवी मुंबई में एक डॉक्टर महिला से “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देकर 1 करोड़ 81 लाख रुपये की ठगी करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गैंग का पर्दाफाश हुआ है। नवी मुंबई पुलिस ने इस गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है और इनके पास से 11 लाख 35 हजार रुपये नकद और अपराध में इस्तेमाल किया गया सामान जब्त किया गया है। इस मामले की जानकारी नवी मुंबई के सहायक पुलिस आयुक्त अजयकुमार लांडगे ने बेलापुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

कैसे रची गई थी ठगी की साजिश?

14 जनवरी से 15 फरवरी 2025 के बीच यह साइबर ठगी की वारदात अंजाम दी गई। पीड़िता एक डॉक्टर हैं, जिनसे ठगों ने व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क किया। उन्होंने खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि महिला ने टैक्स चोरी की है और उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज है। इसके बाद, सीबीआई, ईडी और सुप्रीम कोर्ट के नकली लेटरहेड वाले दस्तावेज व्हॉट्सऐप पर भेजे गए। उन्हें डराया गया कि “अमित चौधरी केस” में उनके नाम से एक क्रेडिट कार्ड बरामद हुआ है। इसके आधार पर उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” करने की बात कही गई और कहा गया कि उनकी पूरी संपत्ति की आरबीआई द्वारा जांच की जाएगी। आरोपियों ने दावा किया कि जांच पूरी होने के बाद सारी राशि वापस कर दी जाएगी, और महिला को अपनी बैंक खातों व शेयर मार्केट की सभी डिटेल्स साझा करने को कहा। महिला ने विश्वास में आकर विभिन्न छह बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 81 लाख 72 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

लगातार पैसों की मांग से हुआ शक

जैसे-जैसे ठगों की पैसों की मांग बढ़ती गई, पीड़िता को संदेह हुआ और उन्होंने अंततः सायबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 17 जनवरी को भारतीय दंड संहिता और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। नवी मुंबई पुलिस की जांच टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से नकद राशि और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोह का हिस्सा है, जो भारत के अलावा अन्य देशों में भी सक्रिय है।

क्या है “डिजिटल अरेस्ट”?

“डिजिटल अरेस्ट” एक नई साइबर ठगी की तकनीक है, जिसमें फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराया जाता है कि उनके खिलाफ केस दर्ज है और उन्हें तुरंत वीडियो कॉल या अन्य ऑनलाइन माध्यम से अरेस्ट किया जाएगा। यह पूरी तरह फर्जी और गैरकानूनी है। कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई संकल्पना नहीं है।

पुलिस की अपील

सहायक पुलिस आयुक्त अजयकुमार लांडगे ने कहा:

“अगर कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर आपको फोन पर धमकी देता है, वीडियो कॉल करता है और डिजिटल अरेस्ट या पैसे ट्रांसफर करने की मांग करता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या सायबर पुलिस से संपर्क करें। किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर करने से पहले उसकी पुष्टि करें।”

कैसे बचें ऐसी ठगी से?

  • किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर सरकारी अधिकारी बनने वाले व्यक्तियों पर विश्वास न करें।
  • बैंक डिटेल्स, OTP, या पर्सनल जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
  • डराने वाली भाषा या कार्रवाई की धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें।
  • https://cybercrime.gov.in पोर्टल पर जाकर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • हेल्पलाइन नंबर 1930 (साइबर फ्रॉड) और 112 (आपातकालीन) का इस्तेमाल करें।
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