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नि:स्वार्थ भाव से निरख जरा, ये सारी दुनिया तेरी है | TP चतुर्वेदी की वायरल कविता
Tejendra Prasad Chaturvedi's Viral poetry : Ye saari duniya teri hai
नवी मुंबई, प्रतिनिधि : बीएआरसी के पूर्व कर्मी तेजेंद्र प्रसाद चतुर्वेदी की यह कविता नए दौर में स्व चिंतन का भाव जगाते हुए आइना दिखाती है. स्वार्थ, लोलुपता, और भौतिक लालसा के बीच निःस्वार्थ दृष्टि से जीवन को जीने और उसे तटस्थ रहकर देखने के लिए प्रेरित करती है. कवि ने समष्टि में व्यष्टि का अवलोकन और व्यष्टि में ईश्वर और सार्वभौमिकता का अनुभव करने का आवाहन किया है. और उससे अधिक ज्ञान एवं भक्ति को आत्मसात करते हुए समर्पण और त्याग से सब कुछ पाने का विश्वास व्यक्त किया है. यह कविता कुछ नहीं से और अधिक की मांग के बीच संतुष्टि का बोध करने के लिए उकसाती है.पढ़कर देखिए.

-लेखकःतेजेन्द्र प्रसाद चतुर्वेदी, BARC के रिटायर्ड अधिकारी हैं)



