
मुंबई में माथाड़ियों का आंदोलन रोका, श्रम आयुक्त ने फिर चटाई वादों की अफीम
Agitation of matahdi workers stopped, Labor commissioner given New assurances
सुधीर शर्मा/मुंबई : एपीएमसी माथाड़ी ट्रांसपोर्ट और कामगारों ने आज मंगलवार मुंबई के बांद्रा स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया और अपनी मांगों पर जोर दिया. मंत्रालय के सामने यह एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन माथड़ी कामगारों से संबंधित मामलों के निपटारे और नवी मुंबई की एपीएमसी मंडियों में चल रही मनमानी, एवं धांधली के खिलाफ रहा. माथाड़ी ट्रांसपोर्ट और जनरल कामगार यूनियन के महासचिव नरेंद्र पाटिल एवं कार्याध्यक्ष शशिकांत शिंदे के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में श्रम मंत्री, श्रम आयुक्त एवं सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन हुआ. इसमें माथाड़ी, मापाड़ी, ट्रांसपोर्ट एवं व्यापारी संघटनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. आंदोलन में विधायक शशिकांत शिंदे, मजदूर नेता गुलाबराव जगताप, बलवंतराव पवार, सुभाष लोमटे, राजकुमार घायल व अन्य नेताओं ने मार्गदर्शन किया, और सरकार को उसके वादों की याद दिलाई.
माथाड़ी कानून लागू करो, कामगारों को न्याय दो
माथाड़ी कामगार व ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेताओं ने कहा कि माथाडी अधिनियम लागू है लेकिन क्रियान्वयन नहीं होने से बड़ी संख्या में माथाडी श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। इनमें माथाडी श्रमिकों का पंजीकरण न होना, अवैध रूप से बर्खास्त श्रमिकों का मु्ददा हल नहीं होना, सरकारी आदेशों का क्रियान्वयन न होना, समय पर वेतन न मिलना, समय पर वेतन और उचित भुगतान न होना, श्रमिकों पर जुर्माना लगाना, बकाया राशि की वसूली में देरी, आरआरसी की वसूली के लिए अनुवर्ती कार्रवाई न करना, निजी बाजार समिति में कानून का क्रियान्वयन न होना, कपास महासंघ और किसी भी चीनी कारखाने में कानून का क्रियान्वयन न होना, एमआईडीसी में 5% कारखानों में भी माथाडी अधिनियम का क्रियान्वयन न होना और अन्य मुद्दे शामिल हैं।जिन पर लगातार मांग और आश्वासन के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है.
सरकारी आश्वासन के बावजूद समाधान क्यों नहीं, 
माथाडी और सुरक्षा गार्ड अधिनियम बचाव कार्रवाई समिति ने विभिन्न माथाडी बोर्डों के रिकॉर्ड में माथाडी श्रमिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बारे में महाराष्ट्र राज्य श्रम आयुक्त को एक बयान प्रस्तुत किया है। कार्य समिति ने श्रम आयुक्त, संयुक्त श्रम आयुक्त (माथाडी), विभिन्न माथाडी बोर्डों के अध्यक्ष और सचिव के साथ कार्य समिति की संयुक्त बैठक आयोजित करने और मुद्दों को हल करने के उपाय करने की मांग की है। मांग की गई थी कि महाराष्ट्र सरकार माथाडी अधिनियम, 1969 में संशोधन करके विभिन्न माथाडी बोर्डों की स्थापना करे और राज्य सरकार और श्रम विभाग से इस अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के उपाय करे। लेकिन राज्य सरकार ने इसे नजरअंदाज कर बजट सत्र में माथाडी अधिनियम संशोधन विधेयक क्रमांक 3 लाया और समाधान लंबित हो गया.
तीव्र विरोध प्रदर्शन की फिर चेतावनी
माथाडी और सुरक्षा गार्ड अधिनियम बचाव कार्य समिति ने कहा कि राज्य सरकार ने नियमों पर सरकारी निर्णय पारित करने का वादा किया था ताकि माथाडी श्रमिकों के अधिकारों को प्रभावित न किया जाए, लेकिन इस संबंध में कार्य समिति के साथ एक भी संयुक्त बैठक नहीं की गई। कार्य समिति ने प्रतीकात्मक हड़ताल और भूख हड़ताल जैसे तीव्र विरोध प्रदर्शन किए फिर भी कोई हल नहीं निकला, सरकार सिर्फ आश्वासन देती रही मुद्दे को टालती रही. कामगार नेताओं ने कहा कि अब विरोध प्रदर्शन को तेज करने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है.



