महाराष्ट्र के गांवों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम: 620 करोड़ रुपये का अनुदान
Central government's big step for Maharashtra's villages: Rs 620 crore grant
दिल्ली : केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पंद्रहवें वित्त आयोग से अनुदान जारी किया है। इस अनुदान में 611.6913 करोड़ रुपये के अबद्ध अनुदान की दूसरी किस्त और 8.4282 करोड़ रुपये के अबद्ध अनुदान की पहली किस्त का शेष हिस्सा शामिल है। यह अनुदान राज्य की 4 पात्र जिला पंचायतों, 40 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 21551 पात्र ग्राम पंचायतों के लिए है। इस अनुदान का उपयोग वेतन और अन्य स्थापना लागतों को छोड़कर संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस (29) विषयों के अंतर्गत स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा। पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) द्वारा अबद्ध अनुदानों का उपयोग निम्नलिखित प्रमुख कार्यों के लिए किया जाएगा:
- स्वच्छता और ओडीएफ स्थिति का रखरखाव
स्वच्छता की बुनियादी सेवाओं के लिए इन अनुदानों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से घरेलू अपशिष्ट का प्रबंधन और उपचार, और मानव मल और मल प्रबंधन शामिल हैं। - पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण
इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति को सुधारने, वर्षा जल संचयन की सुविधा और जल पुनर्चक्रण की पहल को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
केंद्रीय वित्त आयोग का महत्व
भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल और स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। केंद्रीय वित्त आयोग (सीएफसी) अनुदान का हस्तांतरण पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाता है, जिससे वे अपनी स्थानीय विकास आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर पाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित पंचायत से विकसित भारत’ का दृष्टिकोण इस अनुदान के उद्देश्य से मेल खाता है। ये अनुदान जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन की गति को तेज करते हैं। इन अनुदानों के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों को आवश्यक वित्तीय सहायता मिलती है, जिससे वे अपने क्षेत्रीय विकास कार्यों को अधिक प्रभावी रूप से पूरा कर सकते हैं। इस कदम से महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है।



