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SRA पर सुधाकर सोनावणे का छाती ठोक चैलेंज

“Sudhakar Sonawane claims his intervention protected Navi Mumbai slums

नवी मुंबई/ सुधीर शर्मा : नवी मुंबई मनपा की आज 20 अप्रैल की महासभा में झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के लिए निकले एमआईडीसी का टेंडर रद्द होने का मुद्दा सुर्खियों में रहा. सत्तापक्ष बीजेपी ने इसके लिए वनमंत्री गणेश नाईक को क्रेडिट देते हुए अभिनंदन प्रस्ताव लाया. हालांकि इस अभिनंदन प्नस्ताव पर चर्चा के बीच शिवसेना और बीजेपी में जमकर भिड़ंत देखने को मिली. शिवसेना उपनेता विजय चौगुले ने खुलासा किया कि झोपड़टट्टी क्षेत्र के दिग्गज बीजेपी नगरसेवक सुधाकर सोनावणे ने उन्हें फोन किया और टेंडर एवं जीआर में विरोधाभास पर बात की थी.. इस जानकारी के बाद पूर्व मेयर सुधाकर सोनावणे ने जानकारी साझा की और कहा कि झोपड़पट्टी के मुद्दे पर हम दोनों मिलकर सीधे झोपड़पट्टीवासियों के साथ जाकर शिंदे साहब से मिलेंगे। यह बात मैंने आपको कही थी। मैं अपने शब्द बहुत सावधानी से इस्तेमाल करता हूं और जिम्मेदार लोगों से जिम्मेदारी के साथ बात करता हूं। मैंने आपको फोन करके इन दो बातों के बीच का अंतर समझाया था और जांच की मांग की थी।

जमीन के मालिक हम बनेंगे, तब एसआरए क्यों

सोनावणे ने कहा कि  25 तारीख को आया हुआ जीआर (GR) यह कहता है कि झोपड़ी धारकों को उनके घर के नीचे की 500 वर्गफुट जमीन मुफ्त में दी जाएगी। और यदि जमीन 1500 वर्गफुट तक है, तो अतिरिक्त 1000 वर्गफुट के लिए बाजार मूल्य का केवल 10% लेकर उसे नियमित (कायम) किया जाएगा। इससे हमें बहुत खुशी हुई। लेकिन उसके बाद जब टेंडर जारी हुआ, तब हमारी आपत्ति यह थी कि इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं होना चाहिए। अगर सरकार खुद झोपड़ी धारकों को मालिक बना रही है, तो फिर हमें SRA की क्या जरूरत है? उस जीआर के बाद तो SRA की जरूरत ही नहीं रह जाती। मैंने चौगुले साहब, कुलकर्णी साहब और अन्य संबंधित लोगों से भी इस बारे में बात की। झोपड़पट्टियों में लगभग 30% लोग बाद में आए हुए कमर्शियल लोग हैं, जो सिस्टम को मैनेज कर रहे हैं। असली झोपड़ी धारकों की स्थिति बहुत खराब है। सरकार जीआर निकाल रही है, फैसले ले रही है, लेकिन दूसरी तरफ कंपनियों के प्लॉट कागजों पर बेचे जा रहे हैं। ऐसे में SRA हो या क्लस्टर योजना — दोनों ही इस स्थिति में लागू नहीं बैठते।

झोपड़पट्टियों का संरक्षण कानून मैंने लागू कराया -सोनावणे

पूर्व मेयर ने कहा कि ”मैं यह छाती ठोककर कहता हूं कि SRA लागू करने के लिए स्लम घोषित करना जरूरी होता है। और मैं यह भी साफ कहना चाहता हूं कि अगर सुधाकर सोनावणे इस सभागृह में नहीं आते, तो इस शहर में झोपड़पट्टी संरक्षण कानून लागू ही नहीं होता। 2001 में स्लम घोषित करवाया गया था, और इसी वजह से आज 41,801 झोपड़ियों को पुनर्वसन के बिना कोई हाथ नहीं लगा सकता। मैने चौगुले साहब को भी यही बताया। अगर जरूरत पड़े, तो हम सब मिलकर झोपड़ी धारकों के लिए कहीं भी जाएंगे। मैंने स्क्रीन पर भी दिखाया कि मैंने वनमंत्री नाईक साहब से मुलाकात की और सारी बातें सामने रखीं। मैं कुछ भी छिपाने वाला नहीं हूं। अगर आज भी आपकी तैयारी है, तो मुझे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पास ले चलिए। मैं इन तीनों जीआर पर खुलकर चर्चा करना चाहता हूं।

एक जीआर तो ऐसा है जिसमें कहा गया है कि “कंसर्न लेने की जरूरत नहीं है” — क्या हम इतने बेवकूफ हैं कि तलवार के सामने खड़े होकर खुद को कटवाने के लिए कहें? 13 नवंबर 2025 का जीआर पढ़िए — उसमें साफ लिखा है कि कंसर्न नहीं लिया जाएगा। और उसके तुरंत बाद यह टेंडर निकाला गया। यह टेंडर पूरी तरह से अनुचित (अतिरेकी) था, इसलिए मुझे इसके खिलाफ आवाज उठानी पड़ी। और ईमानदारी से प्रयास करने के कारण ही वनमंत्री गणेश नाईक के प्रयासों से यह जीआर रद्द हुआ है. इसलिए अभिनंदन प्रस्ताव लाया गया है.

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