
Chaitra Purnima: भक्ति के गुलाल से रंगा ज्योतिबा मंदिर
Chaitra Purnima: Jyotiba Temple Bathed in the Colors of Devotion
सान्वी देशपांडे;प्रतिनिधि : चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर दक्कन के राजा श्री जोतिबा मंदिर में इस वर्ष भी आस्था का विशाल सागर उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में आयोजित इस भव्य यात्रा ने पूरे ज्योतिबा पर्वत को गुलाल के रंग और “ज्योतिबा च्या नावांन चांगभल” के जयघोष से सराबोर कर दिया। दूर-दूर से आए भक्तों की श्रद्धा, परंपरा और उत्साह ने इस आयोजन को जीवंत और अविस्मरणीय बना दिया।
सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में आधिकारिक अभिषेक और पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। माथे पर गुलाल, हाथों में नारियल और मन में अटूट विश्वास लिए भक्तों की भावनाएं स्पष्ट झलक रही थीं। कई परिवार रातभर यात्रा करके यहां पहुंचे थे, तो कुछ श्रद्धालु हर साल की तरह अपनी परंपरा निभाने आए थे।
इस अवसर पर राज्य के पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई ने सासंकाठी की विधिवत पूजा की और आयोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उनके साथ जिला कलेक्टर अमोल येडगे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिकेयन एस. और पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पारंपरिक विधि-विधान और भव्य जुलूस
मुख्य दिन सुबह मंदिर में आधिकारिक अभिषेक के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। दोपहर में सासंकाठी पूजा के पश्चात भव्य जुलूस निकाला गया, जो इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा। परंपरा के अनुसार, सतारा जिले के पाडली गांव की सासंकाठी को पहला सम्मान दिया गया। इसके बाद ढोल-ताशों और नगाड़ों की गूंज के बीच विभिन्न गांवों से आई कुल 108 सासंकाठी जुलूस में शामिल हुईं। सासंकाठी पर गुलाल और नारियल अर्पित करने की परंपरा तथा उनका मनमोहक नृत्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।
गुलाल से रंगा ज्योतिबा पर्वत
पूरा ज्योतिबा पर्वत गुलाबी गुलाल से ढक गया था, मानो आस्था ने प्रकृति को भी अपने रंग में रंग लिया हो। श्रद्धालु एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाते हुए “ज्योतिबा च्या नावांन चांगभल” के जयकारे लगाते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इस दौरान कई भक्त भावुक भी नजर आए, जो वर्षों से इस यात्रा का हिस्सा बनते आ रहे हैं।
आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम
इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था और परंपरा का यह संगम, ज्योतिबा पर्वत पर उमड़ी श्रद्धा की यह लहर केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक सांस्कृतिक उत्सव भी है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उनकी अटूट श्रद्धा ने चैत्र पूर्णिमा की इस यात्रा को यादगार बना दिया।



