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Mandatai Mhatre: मराठी और इंग्लिश दोनों स्कूल समान रूप चाहिए

Mandatai Mhatre's Suggestion: Schools in Both Marathi and English Mediums Should Coexist

नवी मुंबई / सान्वी देशपांडे : नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की जनरल बॉडी मीटिंग में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसके तहत सभी मराठी माध्यम स्कूलों को इंग्लिश मीडियम में बदलने का निर्णय लिया गया। इस फैसले को लेकर शिक्षण क्षेत्र और अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वर्तमान में निगम के स्कूलों में जूनियर केजी से सीनियर केजी तक मराठी में पढ़ाई होती है, साथ ही सीमित रूप से इंग्लिश भी सिखाई जाती है। कई शिक्षाविदों और स्थानीय प्रतिनिधियों का मानना है कि मराठी माध्यम को पूरी तरह बंद करने के बजाय, उसमें उच्च गुणवत्ता के साथ इंग्लिश शिक्षा को शामिल किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे पर मंदा म्हात्रे ने भी अपनी राय रखते हुए स्पष्ट किया कि मराठी और इंग्लिश—दोनों माध्यमों के स्कूल समानांतर रूप से चलने चाहिए। उन्होंने एक पत्र के माध्यम से विश्वास जताया कि मराठी स्कूलों को बंद करना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मराठी स्कूलों में ही बेहतर इंग्लिश शिक्षा दी जाए—जैसे स्पेशल इंग्लिश क्लास, आधुनिक कोर्स और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति—तो छात्रों को दोनों भाषाओं का लाभ मिल सकता है। मुंबई के कई प्रतिष्ठित मराठी स्कूलों में पहले से ही इस तरह की व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की जा रही है।

एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर सभी स्कूलों को इंग्लिश मीडियम में बदला गया, तो इतने बड़े स्तर पर अनुभवी शिक्षकों और स्टाफ की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाएगी। वर्तमान स्थिति यह है कि निगम के कुछ CBSE स्कूल भी शिक्षकों की कमी के कारण पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दबाज़ी में मराठी माध्यम स्कूलों को बंद करने के बजाय, एक संतुलित नीति अपनानी चाहिए—जहां छात्रों को मातृभाषा के साथ-साथ बेहतर इंग्लिश शिक्षा भी मिले।

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