‘उत्कर्ष’ दिवाली अंक हुआ जारी, लेकर आया खास सामग्री
Utkarsh’ Diwali Edition Released, Packed with Special Features
पुणे: उत्कर्ष प्रकाशन के पहले दिवाली अंक का विमोचन आज (13 तारीख) अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद जोशी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. जोशी ने कहा कि मराठी साहित्य में दिवाली अंकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। ये अंक सर्जनशील लेखकों को तैयार करने वाली प्रयोगशाला के रूप में कार्य करते हैं और आज भी समाजजीवन से वैचारिक मोकलापन बनाए रखते हैं।विमोचन समारोह सावरकर सभागृह, कर्वे रोड में संपन्न हुआ, जिसमें वरिष्ठ संपादक विजय कुवळेकर, वरिष्ठ साहित्यकार मंगला गोडबोले, प्रसिद्ध निवेदक सुधीर गाडगीळ, चित्रकार रवी मुकुल, कवि और लेखक स्वप्नील पोरे, उत्कर्ष प्रकाशन के सु. वा. जोशी और दिवाली अंक की संपादिका नीलीमा जोशी-वाडेकर मंच पर उपस्थित थे। समारोह का संचालन शाम भुर्के ने किया।प्रो. मिलिंद जोशी ने आगे कहा कि दिवाली अंक लेखन के विभिन्न प्रवाहों को स्वीकारते हैं और समय के साथ ये प्रवाह प्रकट होकर पाठकों तक पहुँचते हैं। दिवाली अंकों ने न केवल संपादकों, लेखकों और चित्रकारों के लिए पोषक वातावरण तैयार किया, बल्कि उन्हें प्रतिष्ठा भी दिलाई। वैश्वीकरण के बाद दिवाली अंकों ने अन्य ज्ञानशाखाओं का भी समावेश किया है। हालांकि कुछ अंक में लेखक के साचलेपन का प्रभाव दिखाई देता है, लेकिन भविष्य की दृष्टि से संपादकों को बहिर्मुख होकर पाठकों तक नई सामग्री पहुंचाने की आवश्यकता है।विजय कुवळेकर ने सु. वा. जोशी के कार्यों की सराहना की और कहा कि उनके भीतर की प्रेरणा नई पीढ़ी में ऊर्जा का संचार करती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दिवाली अंकों ने मराठी पाठकों के लिए नए दरवाजे खोले हैं। मंगला गोडबोले ने कहा कि दिवाली एक सामूहिक उत्सव है और दिवाली अंक सामूहिक प्रतिभा, विचार और आनंद का प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहित्य और संस्कृति की पहचान दिवाली अंकों के माध्यम से बनी हुई है।
सुधीर गाडगीळ, रवी मुकुल और स्वप्नील पोरे ने भी अपने विचार और अनुभव साझा किए। समारोह में प्रास्ताविक और मान्यवरों का स्वागत सु. वा. जोशी और नीलीमा जोशी-वाडेकर ने किया।



