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Navi Mumbai Airport : विकास की नई उड़ान के लिए तैयार नवी मुंबई एयरपोर्ट, जानिए पूरी कहानी

Navi Mumbai Airport Takes Off: A New Flight into a New Era of Development : Prakash Bawiskar explains

नवी मुंबई/सुधीर शर्मा : नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अब उड़ान के लिए तैयार है. 1160 हेक्टेयर में फैले भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डा का उद्धाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो रहा है. यह एयरपोर्ट भारत के विकास और अर्थव्यवस्था दोनों का एक नया प्रस्थान बिंदु बन चुका है। इससे ठाणे–रायगढ़–मुंबई क्षेत्र का त्रिकोणीय विकास अब और भी तीव्र गति से आगे बढ़ने वाला है। राज्य सरकार ने एयरपोर्ट तक प्रत्यक्ष मेट्रो लाइन और गोल्ड लाइन मेट्रो का प्रस्ताव रखा है। 22 कि.मी. का अटल सेतु के चलते दक्षिण मुंबई और नवी मुंबई के बीच का यात्रा समय बेहद कम हो गया है. आगे उलवे–खारघर कोस्टल रोड तथा ठाणे–नवी मुंबई कनेक्टर्स से क्षेत्रीय संपर्क और भी सशक्त होने वाला है. पिछले एक दशक में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। भारत को “30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था” बनाने के लक्ष्य को साकार करने में मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों का योगदान 40% से अधिक है। नैना बिल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश बाविस्कर बता रहे हैं-नवी मुंबई एयरपोर्ट से एमएमआर पर कितना व्यापक असर होगा, इसके विकास की असली कहानी क्या है..

एयरपोर्ट जोन में 428 गांव, विकास की शर्त पर हुआ अधिग्रहण

मुंबई एयरपोर्ट पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए पिछले 25 वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इसी दिशा में वर्ष 1997 में नए एयरपोर्ट की परिकल्पना सामने आई। विभिन्न प्रस्तावों में से सिडको द्वारा सुझाई गई भूमि सबसे उपयुक्त पाई गई। केंद्र सरकार ने जब एयरपोर्ट को स्वीकृति दी, तब उसके साथ आस-पास के क्षेत्र के विकास की शर्त भी रखी। इसी को ध्यान में रखते हुए नवी मुंबई एयरपोर्ट इन्फ्लुएंस नोटिफाइड एरिया (NAINA) प्राधिकरण का गठन किया गया और उसकी जिम्मेदारी सिडको को सौंपी गई। वर्तमान में 95 गाँव नैना के अधीन, 71 एमएसआरडीसी के अधीन, 29 पीएमसी के अधीन और 124 गाँव एमएमआरडीए (NTDCKSC) के अधीन हैं — अर्थात कुल 319 गाँवों का विकास जारी है। इससे पहले एनएमएमसी और सिडको के अधीन 109 गाँव थे। इस प्रकार एयरपोर्ट के प्रभाव क्षेत्र में कुल 428 गाँव, लगभग 1,200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आते हैं। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ, स्थानीय विरोध और कानूनी अड़चनों जैसी अनेक चुनौतियों के बावजूद महाराष्ट्र सरकार और सिडको ने निरंतर प्रयास करते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाया। नोडल एजेंसी के रूप में सिडको ने सराहनीय भूमिका निभाई।

विमान से झोपड़पट्टियां न दिखें, ऐसे आई नैना की संकल्पना

उस समय एमएमआरडीए का क्षेत्रीय योजना (Regional Plan) लागू था, जिससे एयरपोर्ट के आस-पास अन्य विकास कार्यों पर प्रतिबंध था। इससे यह आशंका उत्पन्न हो गई थी कि यह क्षेत्र धारावी जैसी झोपड़पट्टियों में बदल सकता है। यह महत्वपूर्ण विषय क्रेडाई–एमसीएचआई के तत्कालीन उपाध्यक्ष श्री प्रकाश बाविस्कर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री पृथ्वीराज चव्हाण के समक्ष एक प्रस्तुति (Presentation) के माध्यम से उठाया। और उसके बाद देश में पहली बार सामने आई, एयरपोर्ट प्रभावित क्षेत्र के विकास की पहली संकल्पना. तत्कालीन मुख्यमंत्री के जरिए यह विचार आगे बढ़ा और फिर नैना यानी नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इन्फ्लुएंस एरिया अस्तित्व में आई. हालांकि एयरपोर्ट क्षेत्र में गांवों की जमीनें अधिगृहित करना एक बड़ी चुनौती थी. लोगों का विरोध आंदोलन शुरू हो गया. उस दौर में लोकनेते डी. बी. पाटिल रायगढ़ के अत्यंत सम्मानित नेता थे — चार बार विधायक, दो बार सांसद और एक बार विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। उन्होंने सिडको, जेएनपीटी और न्हावा शेवा परियोजनाओं में प्रभावित लोगों का नेतृत्व किया। उन्होंने 12.5% भूमि मुआवजे के अधिकार के लिए संघर्ष किया, लाठीचार्ज झेला और जेल भी गए। इसलिए नवी मुंबई एयरपोर्ट को उनके नाम से समर्पित करना सम्मानजनक और उचित निर्णय है।

NM एयरपोर्ट विकास और उद्यमशीलता के नए अध्याय का प्रतीक है

“मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस के दूरदर्शी नेतृत्व और सिडको के तत्कालीन एमडी संजय मुखर्जी तथा वर्तमान एमडी विजय सिंघल के अथक प्रयासों से नवी मुंबई एयरपोर्ट जैसा भव्य प्रकल्प संभव हो सका है. शहरी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव नितिन करीर का नैना विकास आराखड़ा और टीपी स्कीम को मंजूरी देने में योगदान अत्यंत सराहनीय है। यह एयरपोर्ट नवी मुंबई महाराष्ट्र के आत्मविश्वास और उद्यमशीलता के नए अध्याय का प्रतीक है।”-प्रकाश बाविस्कर-अध्यक्ष नैना बिल्डर्स एसोसिएशन

प्रकल्पग्रस्तों का पुनर्वसन, विकास को मिली गति

इस दौरान लोकनेते दिवंगत डी. बी. पाटिल के नाम पर एयरपोर्ट का नाम रखने की माँग को लेकर बड़ा जनआंदोलन हुआ, जिसके कारण राजनीतिक बहस और विवाद भी उभरे, परंतु सिडको ने इन सबका डटकर सामना किया। 2,865 एकड़ भूमि का अधिग्रहण और प्रभावित लोगों का पुनर्वास एक बड़ा कार्य था. महाराष्ट्र सरकार और सिडको इस महान कार्य के लिए विशेष सराहना की पात्र हैं। तत्कालीन एमडी संजय मुखर्जी और वर्तमान एमडी विजय सिंघल ने परियोजना को गति दी। अदाणी समूह ने भी बड़ा आर्थिक सहयोग देते हुए कार्य को समय पर पूरा करने के लिए अथक प्रयास किए। इस यात्रा के दौरान पनवेल और उरण तालुकों के किसानों और ग्रामवासियों ने अपनी समस्याएँ सिडको के समक्ष कानूनी मार्ग से रखीं, और स्थानीय विधायक, सांसद तथा विभिन्न दलों के नेताओं ने उनका सहयोग किया।

विकसित होगी असंख्य परियोजनाएं, मिलेंगे लाखों रोजगार

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पहल के तहत राज्य सरकार विभिन्न कंपनियों के साथ एमओयू कर औद्योगिक और डेटा सेंटर हब विकसित कर रही है। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक पार्क, विश्वविद्यालय, नैना की 12 टीपी स्कीमें, तथा एमएसआरडीसी और एमएमआरडीए द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ विकसित होंगी, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर और विदेशी निवेश आकर्षित होगा। इस क्षेत्र में सस्ते आवास (Affordable Housing) को प्रमुख महत्व मिला है। प्रकाश बाविस्कर ने सिडको और राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें टाउन प्लानिंग (TP) स्कीम लागू करना, आरक्षित भूमि के लिए उचित मुआवजा, टीडीआर नीति (TDR Policy) बनाना और किसानों के लिए भूमि वापसी की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।

बाविस्कर ग्रुप- पूरा कर रहा अफोर्डेबल हाउसिंग का सपना

बाविस्कर ग्रुप अब तक हजारों नागरिकों को बजट होम प्रदान कर चुका है। उलवे में दो बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं और नैना क्षेत्र में लगभग 10,000 घरों वाली एक विशाल टाउनशिप की योजना है, जिसमें डेटा सेंटर और विशेष आर्थिक विकास परियोजनाएँ शामिल होंगी। बाविस्कर ग्रुप के सीएमडी प्रकाश बाविस्कर ने कहा कि एयरपोर्ट के प्रारंभ होने से नैना क्षेत्र में घर और जमीनों की डिमांड बढ़ने वाली है, इससे पहले “नवी मुंबईकरों को इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाना चाहिए, और महाराष्ट्र के लोगों को यहाँ निवेश करना चाहिए क्योंकि यह विकास सिर्फ राष्ट्र के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वयं के भविष्य के लिए भी है। यह एयरपोर्ट नवी मुंबई महाराष्ट्र के आत्मविश्वास और उद्यमशीलता के नए अध्याय का प्रतीक है.

लेखकः प्रकाश बाविस्कर, बाविस्कर ग्रुप के सीएमडी हैं, और नैना बिल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं मराठी बांधकाम व्यवसायिक महासंघ के महासचिव हैं। वे महाराष्ट्रियन बिल्डर्स एसोसिएशन तथा क्रेडाई–एमसीएचआई नवी मुंबई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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