Marathi Film Controversy: हिंदू जनजागृति समिति का अलर्ट: ‘मनाचे श्लोक’ फिल्म संत साहित्य का अपमान!
Marathi Film Controversy: Hindu Janajagruti Samiti's alert: 'Manache Shloka' film is an insult to saint literature!
नवी मुंबई/ प्रतिनिधी: हिंदू जनजागृति समिति ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि मराठी फिल्म ‘मनाचे श्लोक’ का नाम तुरंत नहीं बदला गया, तो हिंदू समाज इसे प्रदर्शित नहीं होने देगा और सड़कों पर आंदोलन करेगा। समिति ने इसे संत साहित्य और धर्मग्रंथों का अपमान बताया।
समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य संयोजक सुनील घनवट ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह फिल्म राष्ट्रसंत श्री समर्थ रामदास स्वामी महाराज द्वारा रचित पवित्र ग्रंथ ‘मनाचे श्लोक’ के नाम का व्यावसायिक और मनोरंजन के उद्देश्य से उपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसा है और संत परंपरा का सीधा अपमान है।
घनवट ने आगे कहा, “यदि फिल्म का नाम नहीं बदला गया, तो समिति सरकार और सेंसर बोर्ड को ज्ञापन देगी और कानूनी नोटिस भी भेजा जाएगा। क्या किसी और धर्म के पवित्र ग्रंथों का नाम लेकर फिल्म बनाई जाती, तो क्या उसे अनुमति दी जाती? लेकिन केवल हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को बार-बार ठेस पहुँचाई जा रही है।”
उन्होंने पहले के उदाहरण देते हुए बताया कि ‘द डा विंची कोड’ और ‘विश्वरूपम’ जैसी फिल्मों के कारण ईसाई और मुस्लिम समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुँचने पर कई राज्यों में उनका प्रदर्शन प्रतिबंधित किया गया था। “यदि इस फिल्म के मामले में कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तो इसके लिए पूरी तरह से निर्माता, निर्देशक और सेंसर बोर्ड जिम्मेदार होंगे,”
घनवट ने न्यायिक दृष्टांत भी साझा किया: “सर्वोच्च न्यायालय ने लाल बाबू प्रियदर्शी बनाम अमृतपाल सिंह [(2015) 16 SCC 795)] के मामले में स्पष्ट किया है कि रामायण जैसे पवित्र ग्रंथों का नाम व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। इसी सिद्धांत के अनुसार, ‘मनाचे श्लोक’ का नाम फिल्म के लिए उपयोग करना कानून और नैतिकता दोनों के खिलाफ है।”
उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 की धारा 5-B का हवाला देते हुए कहा कि जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना एक गंभीर अपराध है और सामाजिक सद्भाव व नैतिकता को खतरे में डालने वाली किसी भी फिल्म को प्रमाणित न करने की जिम्मेदारी सेंसर बोर्ड की है।
अंत में घनवट ने सरकार से मांग की कि ‘मनाचे श्लोक’ शीर्षक को फिल्म से तुरंत और बिना शर्त हटा दिया जाए और भविष्य में धार्मिक प्रतीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कठोर कानून बनाया जाए।
समिति का संदेश साफ है:
“संत साहित्य और धार्मिक ग्रंथों का नाम मनोरंजन या व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं लिया जा सकता। अगर इस चेतावनी को नजरअंदाज किया गया, तो हिंदू समाज आंदोलन के लिए तैयार है।”



