Eknath Shinde Delhi Visit: अचानक दिल्ली रवाना होंगे एकनाथ शिंदे, क्या है पीछे की बड़ी वजह?
Eknath Shinde Delhi Visit: Eknath Shinde will suddenly leave for Delhi, what is the big reason behind it?
मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे आज शाम तात्कालिक रूप से दिल्ली दौरे पर रवाना होने वाले हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह दौरा न केवल औपचारिक है बल्कि इसके पीछे कुछ राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।
आज उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के चलते दिल्ली में एनडीए और बीजेपी के तमाम बड़े नेता व सांसद मौजूद हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे की दिल्ली यात्रा को केवल “शुभकामना” देने की यात्रा मानना शायद जल्दबाजी होगी। बताया जा रहा है कि वे एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन के संभावित विजय पर उन्हें बधाई देने दिल्ली जा सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही उनका कुछ प्रमुख नेताओं से मुलाकात करने का कार्यक्रम भी तय है।
दिल्ली में एकनाथ शिंदे की बीजेपी और मित्रपक्षों के नेताओं के साथ बैठक की संभावना है, जिसमें महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर रणनीति पर चर्चा हो सकती है। इससे पहले भी जब-जब राज्य या युती सरकार में संकट के बादल मंडराए, तब-तब शिंदे का दिल्ली दौरा सुर्खियों में रहा है।
आज का यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस बार डॉ. श्रीकांत शिंदे — जो कि एकनाथ शिंदे के पुत्र और शिवसेना सांसद हैं — को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। श्रीकांत शिंदे ने हाल ही में आयोजित पार्टी मीटिंग के बाद दावा किया कि एनडीए के उम्मीदवार राधाकृष्णन भारी बहुमत से जीतेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि एकनाथ शिंदे का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक तैयारियों का हिस्सा हो सकता है। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव, जिलापरिषद चुनाव और अन्य स्वराज्य संस्था चुनावों के मद्देनजर एनडीए अपनी रणनीति को और मजबूत करना चाहता है। इसी संदर्भ में यह दौरा काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
एकनाथ शिंदे और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच रिश्ते पहले से ही मजबूत माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से उनकी कई बार मुलाकात हो चुकी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार शिंदे दिल्ली से क्या संदेश लेकर लौटते हैं — सिर्फ बधाई, या कोई नई राजनीतिक गोटी?




