गणेशोत्सव में एकत्र हुए 63.695 टन निर्माल्य से बनेगी खाद, उद्यानों में होगा उपयोग
नवी मुंबई में पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव का उत्कृष्ट उदाहरण, नागरिकों ने निभाई अहम भूमिका
नवी मुंबई/प्रतिनिधि: नवी मुंबई में 27 अगस्त से शुरू होकर उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ श्री गणेशोत्सव इस वर्ष पर्यावरण के प्रति विशेष जागरूकता के साथ मनाया गया। नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे द्वारा किए गए ‘पर्यावरण अनुकूल और प्लास्टिक मुक्त गणेशोत्सव’ के आह्वान को शहरवासियों ने दिल से स्वीकारा और पूरी जिम्मेदारी के साथ उसका पालन किया।
इस वर्ष नागरिकों ने बड़ी संख्या में शाडू मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों की स्थापना की, जिसके लिए उन्हें ‘पर्यावरणमित्र’ प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी किया गया। साथ ही, माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए 6 फीट से कम ऊँचाई वाली मूर्तियों का विसर्जन 143 कृत्रिम विसर्जन स्थलों पर किया गया।
निर्माल्य संकलन में दिखी नागरिकों की जागरूकता
गणेश विसर्जन के दौरान नागरिकों ने मूर्तियों के साथ आने वाले फूल, माला, दूर्वा, तुलसी, फल के छिलके जैसे गीले निर्माल्य और सजावटी वस्तुएं जैसे सूखे निर्माल्य को अलग-अलग कलशों में डालने के नियम का भी भरपूर समर्थन किया। महानगरपालिका द्वारा इस कार्य के लिए विशेष निर्माल्य कलश और वाहन उपलब्ध कराए गए।
विसर्जन के चार प्रमुख दिनों में निम्नलिखित मात्रा में निर्माल्य एकत्र हुआ:
- गौरी विसर्जन (सातवां दिन) – 24.440 टन
- दीड दिवस (ढाई दिन) – 14.205 टन
- अनंत चतुर्दशी (दसवां दिन) – 14.070 टन
- पंचमी (पांचवां दिन) – 10.980 टन
इस प्रकार कुल मिलाकर 63.695 टन निर्माल्य एकत्रित किया गया।
खाद निर्माण के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू
एकत्रित निर्माल्य को विशेष वाहनों के माध्यम से तुर्भे स्थित प्रकल्प स्थल पर पहुंचाया गया है, जहाँ इस पर वैज्ञानिक पद्धति से जैविक खाद (कम्पोस्ट) बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह खाद नवी मुंबई के विभिन्न उद्यानों में उपयोग की जाएगी, जिससे शहर की हरियाली को और बढ़ावा मिलेगा।
धर्माधिकारी प्रतिष्ठान ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
डॉ. श्री नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान, रेवदंडा की ओर से कोपरखैरणे के धारणा तालाब, कोपरी और महापेगांव तालाबों से फूलों की पंखुड़ियाँ और अन्य निर्माल्य एकत्र कर खाद निर्माण की पहल की गई है।
नागरिकों की भागीदारी बनी मिसाल
इस वर्ष का गणेशोत्सव नवी मुंबई के लिए पर्यावरण के क्षेत्र में एक मिसाल बन गया है। नागरिकों की जागरूकता, प्रशासन का सुनियोजित प्रयास और सामूहिक सहभागिता से यह सिद्ध हुआ है कि परंपरा और पर्यावरण दोनों को संतुलित रखा जा सकता है।



