ओबीसी समाज के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: मंत्रिमंडल उपसमिति गठित, छगन भुजबळ की नाराज़गी बनी चर्चा का विषय
Maharashtra government's big decision for OBC community: Cabinet sub-committee formed, Chhagan Bhujbal's displeasure becomes a topic of discussion
मुंबई/प्रतिनिधि: महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज की मांगों पर शासन निर्णय जारी करने के बाद अब ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समाज के लिए भी एक अहम और बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने ओबीसी समुदाय से जुड़े मुद्दों के निराकरण के लिए स्वतंत्र मंत्रिमंडलीय उपसमिति के गठन को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय बुधवार, 3 सितंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। सरकार के इस निर्णय को मराठा आरक्षण से उपजे सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को साधने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। मराठा समाज के लिए लिए गए फैसले के बाद ओबीसी समाज में आक्रोश देखने को मिल रहा था, और राज्यभर में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और साखळी आंदोलन (श्रृंखलाबद्ध आंदोलन) हो रहे थे।
क्या बोले मंत्रीगण?
पानीपुरवठा मंत्री गुलाबराव पाटील ने मीडिया से बातचीत में कहा, “बहुत दिनों से ओबीसी समुदाय के मुद्दों पर विशेष मंत्रिमंडल उपसमिति बनाए जाने की मांग की जा रही थी। आज उसे मंजूरी दे दी गई है। इस समिति में हर राजनीतिक दल से दो-दो मंत्रियों को शामिल किया जाएगा।”
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जानकारी दी कि यह समिति ओबीसी समुदाय के सवालों को गंभीरता से लेकर उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ओबीसी समाज के साथ कोई अन्याय न हो। उनके न्यायपूर्ण अधिकारों की रक्षा के लिए ही यह समिति गठित की गई है।”
उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा कि पिछली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय ले लिया गया था और आज इसे अंतिम रूप दिया गया है।
कौन-कौन हैं समिति में शामिल?
नवगठित ओबीसी मंत्रिमंडलीय उपसमिति में कुल 8 मंत्री शामिल हैं। इनमें:
- चंद्रशेखर बावनकुळे (अध्यक्ष)
- छगन भुजबळ
- गणेश नाईक
- गुलाबराव पाटील
- संजय राठोड
- पंकजा मुंडे
- अतुल सावे
- दत्तात्रय भरणे
इस समिति में भाजपा के 4, शिवसेना के 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के 2 मंत्री शामिल हैं। यह समिति ओबीसी समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थितियों का अध्ययन कर उनके हितों की रक्षा के लिए योजनाएं एवं नीतियां बनाएगी।
छगन भुजबळ की नाराज़गी बनी चर्चा का विषय
जहाँ एक ओर ओबीसी उपसमिति के गठन को लेकर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं दूसरी ओर राज्य के अन्न और नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबळ की नाराज़गी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। भुजबळ ने मराठा आरक्षण पर जारी शासन निर्णय (GR) को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “कल जो जीआर (शासन निर्णय) निकाला गया, उसे लेकर ओबीसी समाज के नेता और कार्यकर्ता असमंजस में हैं। हम इस पर कानूनी सलाह ले रहे हैं। किसी भी जाति को जबरन दूसरी जाति में शामिल करने का अधिकार सरकार को नहीं है। जाति बदली नहीं जा सकती।”
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस विषय पर सभी ओबीसी नेताओं की एक विशेष बैठक बुलाई गई है। गौर करने वाली बात यह रही कि बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में छगन भुजबळ अनुपस्थित रहे, जिससे उनकी नाराज़गी की अटकलें और तेज़ हो गई हैं।
राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश
राज्य सरकार की यह पहल मराठा और ओबीसी समाज के बीच पैदा हो रही सामाजिक असंतुलन की स्थिति को टालने की एक कोशिश के रूप में देखी जा रही है। मराठा समुदाय को आरक्षण देने के प्रयासों से ओबीसी वर्ग के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही थी। ऐसे में इस उपसमिति का गठन करना सरकार के लिए सामाजिक न्याय और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक रणनीतिक कदम कहा जा सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह उपसमिति कितनी सक्रियता से कार्य करती है और ओबीसी समुदाय के वास्तविक मुद्दों को हल करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। वहीं, छगन भुजबळ जैसे वरिष्ठ ओबीसी नेता की नाराज़गी सरकार के लिए एक चुनौती भी बन सकती है, जिससे निपटने के लिए राजनीतिक संवाद और विश्वास बहाली आवश्यक होगी।




