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मराठा आंदोलन के बाद मुंबई के आज़ाद मैदान में बीएमसी की स्वच्छता मुहिम

After the Maratha movement, BMC's cleanliness drive at Azad Maidan in Mumbai

 

मुंबई/प्रतिनिधि : मराठा आरक्षण की माँग को लेकर मुंबई के आज़ाद मैदान में पिछले पाँच दिनों से जारी आंदोलन का मंगलवार को शांतिपूर्ण समापन हो गया। इस ऐतिहासिक जनआंदोलन के दौरान लाखों की संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई पहुँचे। इस आंदोलन के समाप्त होते ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने तत्परता दिखाते हुए आज़ाद मैदान और आसपास के इलाकों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया। मराठा समाज द्वारा 29 अगस्त से 2 सितंबर तक किए गए आंदोलन के दौरान BMC ने आंदोलनकारियों के लिए नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आंदोलन स्थल पर:

  • तीन प्रमुख स्थानों पर कुल 450 मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था की गई थी।
  • कचरा संग्रहण के लिए 500 किलो थैलियों का वितरण किया गया।
  • आंदोलन स्थल पर 24 घंटे सक्रिय मेडिकल कैम्प की सुविधा दी गई, जिसका लाभ 10,000 से अधिक आंदोलनकारियों ने उठाया।

BMC प्रशासन ने बताया कि पांच दिनों तक रोज़ाना सफाई अभियान भी जारी रहा, जिससे मैदान में स्वच्छता बनी रही। खास बात यह रही कि आंदोलनकारी स्वयं भी स्वच्छता में सहयोग कर रहे थे, जिससे प्रशासन को भी राहत मिली।

आंदोलन के बाद युद्धस्तर पर सफाई अभियान

2 सितंबर को आंदोलन के शांतिपूर्ण समापन के बाद, BMC ने उसी रात से लेकर 3 सितंबर की भोर तक युद्धस्तर पर स्वच्छता मुहिम चलाई। इसके तहत: 6 बड़े कॉम्पैक्टर, 6 छोटे कॉम्पैक्टर, कचरा वहन गाड़ियाँ, 2 सक्शन मशीनें, 2 जेटिंग संयंत्र, 13 SCV वाहन, 52 टैंकर, इस तरह कुल 96 वाहनों की मदद से सफाई अभियान चलाया गया। बीएमसी के कर्मचारियों ने पूरी रात मेहनत कर आज़ाद मैदान को उसकी मूल अवस्था में बहाल कर दिया।

आंदोलनकारियों का सहयोग भी रहा सराहनीय

BMC प्रशासन ने बताया कि मराठा आंदोलन में भाग लेने वाले नागरिकों का सहयोग भी बेहद अनुकरणीय रहा। उन्होंने न सिर्फ कचरा एकत्र करने के लिए दिए गए थैलों का उपयोग किया, बल्कि मैदान की स्वच्छता बनाए रखने में भी मदद की। इस पर BMC ने आंदोलनकारियों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

स्वास्थ्य सेवाएं भी रहीं मुस्तैद

BMC के स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए 24×7 मेडिकल कैम्प ने इस आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हजारों की संख्या में आंदोलनकारी इस सुविधा का लाभ उठाने पहुंचे। मेडिकल टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया था। इस पूरे घटनाक्रम ने यह दर्शा दिया कि किसी भी बड़े जनांदोलन को शांति, स्वच्छता और संयम के साथ भी संचालित किया जा सकता है। मराठा समाज के संयम और BMC की तत्परता के चलते यह आंदोलन एक सामाजिक चेतना और व्यवस्था की मिसाल बनकर सामने आया है।

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