FSI भार पर भाजपा का बड़ा एक्शन! आमसभा में पेश होगा विशेष प्रस्ताव
BJP’s Special Motion Regarding Scientific Calculation of FSI Load
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : महाराष्ट्र सरकार की यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस (UDCPR) नीति को लेकर नवी मुंबई में राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। राज्य के वन मंत्री गणेश नाइक ने उपमुख्यमंत्री एवं शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे के शहरी विकास विभाग पर निशाना साधते हुए कहा है कि बढ़े हुए FSI, क्लस्टर रीडेवलपमेंट और अतिरिक्त कारपेट एरिया जैसी नीतियों का शहर के बुनियादी ढांचे पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
इसी बीच, नवी मुंबई महानगरपालिका के सभागृह नेता सागर नाइक ने आगामी महासभा में विशेष प्रस्ताव लाकर शहर की कैरिंग कैपेसिटी (Carrying Capacity) का वैज्ञानिक आकलन कराने के लिए किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था या स्टडी ग्रुप की नियुक्ति की मांग की है।

शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ेगा दबाव
प्रस्ताव में कहा गया है कि UDCPR के नए प्रावधानों, बढ़े हुए FSI, सोसायटी रीडेवलपमेंट, स्लम रीडेवलपमेंट और MIDC क्षेत्रों में आवासीय विकास के कारण भविष्य में शहर की आबादी तेजी से बढ़ सकती है। इसका सीधा असर सड़क नेटवर्क, जलापूर्ति, सीवेज सिस्टम, बिजली, सार्वजनिक सुविधाओं, पर्यावरण, अर्बन हीट और शहर की समग्र वहन क्षमता पर पड़ेगा।
इसी कारण सभी संबंधित विभागों के समन्वय से एक व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराए जाने की मांग की गई है।
घनसोली क्लस्टर प्लान बना नया विवाद
नवी मुंबई महानगरपालिका ने हाल ही में घनसोली क्षेत्र के लगभग 68 एकड़ इलाके में क्लस्टर रीडेवलपमेंट योजना घोषित की है और इस पर आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए हैं। इससे पहले वाशी के नौ सेक्टरों में भी क्लस्टर योजना लागू की जा चुकी है।
गणेश नाइक का आरोप है कि बिना पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए बड़े पैमाने पर रीडेवलपमेंट और अतिरिक्त FSI देने से भविष्य में नवी मुंबई रहने योग्य शहर नहीं रह जाएगा।
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CRISIL मॉडल पर दोबारा स्टडी की तैयारी
करीब दो दशक पहले, वर्ष 2005 से 2007 के बीच, CIDCO की पुरानी इमारतों के रीडेवलपमेंट के लिए ढाई FSI प्रस्ताव पर नवी मुंबई महानगरपालिका ने CRISIL से विस्तृत अध्ययन कराया था। उस रिपोर्ट के आधार पर पानी और सीवेज जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई थी।
सागर नाइक का कहना है कि UDCPR लागू होने के बाद राज्य के किसी भी शहर में इस प्रकार का वैज्ञानिक प्रभाव अध्ययन नहीं कराया गया। इसलिए नए नियमों से शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने वाले प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन आवश्यक हो गया है।
भविष्य की आबादी और शहर की क्षमता पर सवाल
नगर नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि नए निर्माण नियमों के चलते बड़े पैमाने पर FSI वितरित किया जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में नवी मुंबई की आबादी में लाखों की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में शहर की वास्तविक क्षमता, संसाधनों और नागरिक सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन समय की आवश्यकता बन गया है।



