नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूमिपुत्रों का प्रदर्शन
'Bhumiputras' (Sons of the Soil) Protest at Delhi's Jantar Mantar Over Navi Mumbai Airport Naming
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : पिछले पांच वर्षों से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम लोकनेता एवं पूर्व सांसद डी. बी. पाटिल के नाम पर रखने की मांग कर रहे भूमिपुत्रों ने अब अपना आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है। बुधवार को मुंबई महानगर क्षेत्र और रायगढ़, ठाणे, पालघर सहित पांच तटीय जिलों से सैकड़ों भूमिपुत्र दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के लिए बड़ी संख्या में लोग बस, ट्रेन और हवाई मार्ग से दिल्ली पहुंचे। आंदोलन को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए “दिबांची वारी दिल्लीची दारी” नाम से जसाई से दिल्ली तक दिंडी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लेकर आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिया।

वर्षों बीत जाने के बावजूद केंद्रीय से मंजूरी नहीं
आंदोलनकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार पहले ही नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम लोकनेता डी. बी. पाटिल के नाम पर रखने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज चुकी है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। इसी बीच एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत होने से स्थानीय भूमिपुत्रों में नाराजगी और बढ़ गई है।
इस मुद्दे को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई चरणों में आंदोलन किए जा चुके हैं। 24 जून को डी. बी. पाटिल की जयंती पर चिंचपाड़ा में भूख हड़ताल आयोजित की गई थी। इसके बाद 8 जुलाई को पनवेल से मंत्रालय तक पैदल मार्च निकाला गया, जिसमें शामिल आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। राज्य सरकार की ओर से केवल आश्वासन मिलने के बाद भूमिपुत्रों ने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए दिल्ली में प्रदर्शन का निर्णय लिया।
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जब तक डी. बी. पाटिल के नाम पर आधिकारिक घोषणा नहीं, तब तक आंदोलन रहेगा जारी
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम लोकनेता डी. बी. पाटिल के नाम पर आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच मावल से सांसद श्रीरंग बारणे ने पहले भी स्पष्ट किया था कि एयरपोर्ट के नामकरण पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को लेना है। राज्य सरकार भी बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि उसने डी. बी. पाटिल के नाम का ही प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।
स्थानीय संगठनों का आरोप है कि प्रस्ताव लंबित होने के बावजूद एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू कर दी गईं, जिससे भूमिपुत्रों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। यही कारण है कि अब यह आंदोलन केवल नामकरण तक सीमित नहीं रहकर भूमिपुत्रों की पहचान, सम्मान और अस्मिता का प्रतीक बन गया है। आंदोलन के आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती, तो देशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



