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Film Kahlid Ka Shivaji पर प्रतिबंध लगाओ, हिंदू जनजागृति समिति की सरकार से मांग

Ban the film Kahlid Ka Shivaji, Hindu Janajagruti Samiti demands from the government

विशेष प्रतिनिधि/ मुंबईः हिंदू जनजागृति समिति ने आगामी दिनों में रिलीज होने वाली मराठी फिल्म ‘खालिद का शिवाजी’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.समिति ने एक प्रेस विज्ञप्तित जारी कर कहा है कि इस फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में ऐतिहासिक दृष्टि से झूठी, तथ्यहीन और विकृत जानकारी प्रस्तुत की गई है, जिससे जनता को गुमराह किया जा रहा है। इस विकृत चित्रण से शिवप्रेमियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। हिंदू जनजागृति समिति की दलील है कि जैसे ‘‘उदयपुर फाइल्स : कन्हैयालाल टेलर मर्डर’’ फिल्म को मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होने के कारण प्रतिबंधित किया गया था, उसी प्रकार ‘‘खालिद का शिवाजी’’ फिल्म पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. समिति ने राज्य और केंद्र सरकार को खत लिखकर इस पर एक्शन लेने की अपील की है.

छत्रपति शिवाजी महाराज को सेक्यूलर दिखाना झूठ है-समिति

फिल्म में यह दावा किया गया है कि शिवाजी महाराज की सेना में 35% मुस्लिम सैनिक थे, उनके 11 अंगरक्षक मुस्लिम थे, और उन्होंने रायगढ़ में एक मस्जिद बनवाई थी। समिति के अनुसार ये सभी दावे झूठे, भ्रामक और ऐतिहासिक प्रमाणों के बिना हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे। उन्होंने अपने सौतेले भाई व्यंकोजी को पत्र में लिखा था, “तुर्क फौज में रखे तो जय कैसे होगा?” ऐसे स्पष्ट संदर्भ होते हुए भी, उन्हें जानबूझकर ‘सेक्युलर’ दिखाने का प्रयास इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने जैसा है।

मुस्लिम समाज ने खत्म करने का षडयंत्र क्यों रचा, बड़ा सवाल

यदि मुस्लिम समाज को छत्रपति शिवाजी महाराज से वास्तव में प्रेम होता, तो पांच मुस्लिम बादशाहों ने उन्हें खत्म करने का षड्यंत्र न रचा होता। छत्रपति संभाजी महाराज की यातनाओं के साथ हत्या न की गई होती। हाल ही में पुणे के यवत में ‘सैय्यद’ नामक कट्टर मुस्लिम युवक ने शिवाजी महाराज की मूर्ति को तोड़ा यह घटना भी इस दावे को झुठलाती है।

विकृत चित्रण कानून व्यवस्था के लिए खतरा है

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 (2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 295(ए) के अनुसार, ऐसे विकृत चित्रण धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाले और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं। पूर्व में ‘पद्मावत’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्मों के समय भी विकृत इतिहास के कारण जन आक्रोश देखने को मिला था। इसी पृष्ठभूमि में, जब तक इस फिल्म की ऐतिहासिक जानकारी का प्रमाणित सत्यापन नहीं होता, तब तक इस पर प्रतिबंध लगाया जाए, यह समिति की मांग है।
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