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Prashant Thakur की Assembly में बड़ी मांग: पनवेल में जरूरी है CCTV निगरानी

Prashant Thakur's big demand in the Assembly: CCTV surveillance is necessary in Panvel

पनवेल/प्रतिनिधि: महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में अनियंत्रित रूप से लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरों को लेकर उठती चिंताओं के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा की है कि राज्य सरकार जल्द ही एक एकीकृत एसओपी (Standard Operating Procedure) जारी करेगी। इसका उद्देश्य सीसीटीवी कैमरा परियोजनाओं को सुव्यवस्थित करना, उनकी मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी तय करना तथा वित्त पोषण की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। विधानसभा में चर्चा के दौरान आमदार प्रशांत ठाकुर ने रायगढ़ जिले सहित राज्यभर में लगे सीसीटीवी कैमरों की दुर्दशा और रखरखाव की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जैसे पानी और बिजली आवश्यक सेवाएं हैं, वैसे ही सुरक्षा के मद्देनज़र शहरी क्षेत्रों में मजबूत सीसीटीवी निगरानी प्रणाली अब समय की मांग बन चुकी है। ठाकुर ने रायगढ़ जिले की सभी नगरपालिकाओं में सीसीटीवी सुरक्षा आराखड़ा (सुरक्षा योजना) तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए पुलिस प्रशासन से राज्य सरकार को इस बारे में सूचित करने की मांग की।

सीसीटीवी प्रोजेक्ट्स में भारी अनियमितता
पेण विधानसभा क्षेत्र के आमदार रविशेठ पाटील ने रत्नागिरी और रायगढ़ जिलों में लगे सीसीटीवी कैमरों की खराब स्थिति को लेकर तारांकित प्रश्न पूछा। आमदार ठाकुर ने उपप्रश्न के रूप में खोपोली शहर का उदाहरण दिया, जहां 40 प्रतिशत कैमरे काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन कंपनियों ने कैमरे लगाए हैं, यदि वे ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं तो क्या उन पर जुर्माना लगाया जाएगा? क्या ऐसी लापरवाह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा?

मुख्यमंत्री का आश्वासन: एकल अनुमति प्रणाली और विभागीय जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वर्तमान में कोई भी कहीं भी सीसीटीवी कैमरे लगा देता है, पर न तो वित्त स्रोत की जानकारी होती है और न ही मेंटेनेंस की कोई स्पष्ट व्यवस्था होती है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को हल करने के लिए हाल ही में एक बैठक में एकीकृत एसओपी तैयार करने पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कैमरे लगाने के लिए ‘सिंगल पॉइंट परमिशन’ प्रणाली लागू की जाएगी और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एक ही विभाग के अधीन लाई जाएगी – चाहे वह गृह विभाग हो या पुलिस या कोई अन्य विभाग। इस नीति की घोषणा शीघ्र की जाएगी।

गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर का खुलासा – 50 से 60 प्रतिशत कैमरे बंद
गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर ने भी विधानसभा में जानकारी दी कि रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों में सीसीटीवी प्रोजेक्ट विभिन्न स्रोतों – जैसे डीपीडीसी और सीएसआर – के माध्यम से क्रियान्वित किए गए। रत्नागिरी में पुलिस विभाग द्वारा पूरी योजना सफलतापूर्वक चलाई गई, जबकि रायगढ़ में अनेक स्थानों पर नगरपालिकाएं जिम्मेदार थीं, जहां पर 50-60% कैमरे बंद पाए गए। उन्होंने बताया कि संबंधित नगरपालिकाओं को कार्रवाई करनी थी, पर कई स्थानों पर यह नहीं हो पाया। राज्यमंत्री भोयर ने बताया कि रत्नागिरी जिले में बंद कैमरों की शिकायत मिलने पर संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजी गई और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स गृह विभाग के माध्यम से ही संचालित किए जाएंगे, जिससे जवाबदेही तय हो सके।

तत्काल बैठक और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन
राज्यमंत्री पंकज भोयर ने अंत में कहा कि रायगढ़ जिले की सीसीटीवी प्रणाली को जल्द से जल्द चालू करने हेतु संबंधित विभागों की आपात बैठक बुलाई जाएगी, बंद पड़े कैमरों की मरम्मत तुरंत करवाई जाएगी, और जो कंपनियां दोषी पाई जाएंगी, उन पर कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार की यह पहल, जिसमें एकीकृत एसओपी लाकर सीसीटीवी परियोजनाओं को नियंत्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा, निश्चित रूप से शहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। आमदारों द्वारा उठाए गए सवालों और सरकार की तत्परता से स्पष्ट है कि राज्य प्रशासन अब सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को केवल एक शोपीस न मानते हुए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण के रूप में गंभीरता से ले रहा है।

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