सांगली की ऋतुजा बनी धर्मांतरण की शिकार, पुणे में गरजा आक्रोश मोर्चा
Sangli’s Rutuja Falls Victim to Religious Conversion, Massive Protest Erupts in Pune
पुणे/प्रतिनिधि: धर्मांतरण के मुद्दे पर अब राजनीति और सामाजिक संगठनों में जबरदस्त उबाल देखा जा रहा है। पुणे में आयोजित एक आक्रोश मोर्चा के दौरान भाजपा विधायक गोपीचंद पडळकर ने हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में धर्मांतरण कर चुके लोगों की पहचान करें और यदि वे अब भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, तो उन्हें सरकारी नौकरियों से हटाया जाए। उन्होंने साफ कहा कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़ चुका है, उसे हिंदू आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए, और इस संबंध में न्यायालय का स्पष्ट निर्णय मौजूद है।
ऋतुजा की आत्महत्या नहीं, “हत्या” है – पडळकर
यह बयान उन्होंने पुणे के स्वारगेट स्थित लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे पुतला परिसर में आयोजित “धर्मांतरण बंदी कानून” की माँग को लेकर निकाले गए मोर्चे के दौरान दिया। मोर्चे का मुख्य उद्देश्य था – सांगली की गर्भवती युवती ऋतुजा, जिसने कथित तौर पर धार्मिक दबाव और अत्याचार के चलते आत्महत्या की, उसे न्याय दिलाना और धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून की माँग करना।
पडळकर ने कहा –
“धर्म का प्रचार करना संविधान के अनुसार अपराध नहीं है, लेकिन गरीबी, अज्ञानता और लालच का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन कराना स्पष्ट रूप से अपराध है। ऋतुजा ने आत्महत्या नहीं की, उसे मजबूर किया गया, इसलिए यह हत्या है। जब तक धर्मांतरण विरोधी कानून नहीं आता, हम चुप नहीं बैठेंगे।”
~ गोपीचंद पडळकर (भाजपा विधायक)
“धर्मांतरण है राष्ट्रांतरण” – अॅड. वर्षा डहाळे
इस मोर्चे में किर्तनकार संग्राम बापू भंडारे, अॅड. वर्षा डहाळे, और विकास लवटे जैसे वक्ताओं ने भी भाषण दिए।
अॅड. डहाळे ने अपने भाषण में कहा:
“धर्मांतरण केवल धर्म का नहीं, बल्कि राष्ट्र का परिवर्तन है। देश की माटी और संस्कृति के साथ यह धोखा है। इसलिए ऐसे पादरी और संगठन जो धर्मांतरण के लिए अत्याचार कर रहे हैं, उन पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।”
सांगली में ऋतुजा का स्मारक बनाने की मांग
किर्तनकार संग्राम बापू भंडारे ने कहा कि ऋतुजा की कुर्बानी को सिर्फ हिंदुत्ववादी चश्मे से देखना गलत होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उसका त्याग आने वाली पीढ़ियों को याद रहे, इसके लिए सांगली में उसका स्मारक बनना चाहिए।
उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा:
“डॉ. आंबेडकर ने इस्लाम और ईसाई धर्म को अस्वीकार करते हुए बौद्ध धर्म को अपनाया, क्योंकि उन्होंने इन मजहबों में राजनीतिक उद्देश्यों की आशंका देखी थी। आज यदि कुछ ईसाई कार्यकर्ता बाबासाहेब के नाम का इस्तेमाल कर प्रशासन को ब्लैकमेल कर रहे हैं, तो यह पूरी तरह संविधान विरोधी है।”
“धनगर समाज नहीं झुकेगा” – विकास लवटे
विकास लवटे, जो स्वयं धनगर समुदाय से आते हैं, ने कहा कि उनके समाज को धर्मांतरण के जाल में नहीं फंसने दिया जाएगा। इसके लिए वह गाँव-गाँव जाकर जनजागृति अभियान चलाएँगे।
मुख्य माँगें और मुद्दे:
- धर्मांतरण कर चुके लोगों की जाति प्रमाणपत्र से हिंदू जाति हटाई जाए
- उन्हें मिलने वाला राजनीतिक, शैक्षणिक और सरकारी आरक्षण बंद हो
- धर्मांतरण विरोधी कड़ा कानून जल्द बनाया जाए
- ऋतुजा आत्महत्या कांड की उच्च स्तरीय जांच और न्याय
- सांगली में ऋतुजा का स्मारक निर्माण
- धर्मांतरण के नाम पर हो रहे अत्याचार पर कानूनी कार्रवाई हो
धर्मांतरण पर बहस और संघर्ष अब केवल धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं रहा, यह एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले रहा है। पुणे में हुए इस मोर्चे ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि धर्मांतरण का मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में अहम भूमिका निभाएगा।




