Uday Samant | खराब भोजन पर गुस्सा सही, लेकिन हिंसा नहीं – मंत्री उदय सामंत
Uday Samant | Anger over bad food is justified, but violence is not - Minister Uday Samant
मुंबई/प्रतिनिधी : आमदार निवास में कर्मचारी से मारपीट मामले में शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड घिरते नजर आ रहे हैं। इस घटना की चारों ओर निंदा हो रही है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना नेता उदय सामंत ने भी इस मामले में संजय गायकवाड को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि गायकवाड की इस तरह की कार्रवाई का कोई भी समर्थन नहीं कर सकता। मंत्री उदय सामंत ने विधान भवन परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए साफ शब्दों में कहा कि, “संजय गायकवाड की कार्रवाई से हममें से कोई भी सहमत नहीं है।” उन्होंने कहा कि विधायक निवास में दिए गए भोजन में मिलावट या गुणवत्ता की कमी एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसे सुलझाने का एक तय प्रक्रिया और तरीका होता है। किसी भी हाल में हिंसा करना या कर्मचारी के साथ मारपीट करना जायज नहीं ठहराया जा सकता। “यह सही है कि खाना खाने योग्य नहीं था और उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी, लेकिन इस पर सुसंगत कार्यवाही होनी चाहिए थी। जो तरीका संजय गायकवाड ने अपनाया, वह पूरी तरह अनुचित है और उसका कोई भी समर्थन नहीं कर सकता।” उदय सामंत ने कहा कि इस मामले में शिवसेना के शीर्ष नेता और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे स्वयं संजय गायकवाड को उचित समझाइश देंगे। “हम खुद भी उनसे इस विषय में चर्चा करेंगे। खराब गुणवत्ता वाले भोजन की जांच आवश्यक है क्योंकि यह सभी की सेहत के लिए खतरनाक है, लेकिन इसका समाधान हिंसा नहीं हो सकता।”इसके अलावा मंत्री सामंत ने शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सरनाईक ने मीरा-भाईंदर में मराठी भाषा के समर्थन में जो मुखर भूमिका निभाई वह अत्यंत सराहनीय है। “वे स्वयं मराठी माणूस के मोर्चे में शामिल हुए और शिवसेना की स्पष्ट भूमिका रखी।” हालांकि, उन्होंने वहां हुए हंगामे पर नाराजगी जताई और कहा, “कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की। दरअसल, उन्हें शिवसेना का अच्छा काम रास नहीं आ रहा है, इसलिए इस तरह की उपद्रवपूर्ण हरकतें की गईं।” मंत्री उदय सामंत का यह बयान साफ संकेत देता है कि पार्टी के भीतर भी संजय गायकवाड की हिंसक कार्रवाई को लेकर नाराजगी है। शिवसेना नेतृत्व इस पर गंभीर है और जल्द ही इस पर उचित निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही, यह प्रकरण बताता है कि सत्ता में होते हुए भी अनुशासन और मर्यादा का पालन सभी नेताओं को करना अनिवार्य है।




