Sanjay Gaikwad | आमदार निवास में हंगामा: संजय गायकवाड ने की कर्मचारी की पिटाई!
Sanjay Gaikwad | Ruckus in MLA residence: Sanjay Gaikwad beats up an employee!
मुंबई/प्रतिनिधि: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हंगामा मच गया है। इस बार मामला सीधे आमदार निवास से जुड़ा है, जहां शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड ने एक कर्मचारी के साथ कथित रूप से मारपीट की है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिससे आम जनता और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। मंगलवार, 8 जुलाई की रात को यह घटना आमदार निवास परिसर में घटी। जानकारी के अनुसार, विधायक संजय गायकवाड ने रात्रि भोजन के लिए ऑर्डर दिया था। भोजन उनके कमरे तक पहुंचाया गया, लेकिन जब उन्होंने भोजन का स्वाद चखा, तो उन्हें उसमें खराबी लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जो दाल और चावल परोसे गए, वे शिळे (बासी) थे और उनमें से बदबू भी आ रही थी। इससे नाराज होकर संजय गायकवाड ने सीधा आमदार निवास के कैंटीन का रुख किया और वहां मौजूद कर्मचारियों से इस मुद्दे पर बहस करने लगे। बहस इतनी बढ़ गई कि विधायक ने गुस्से में एक कर्मचारी के साथ हाथापाई कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गायकवाड ने कर्मचारी को थप्पड़ मारे और बुरी तरह डांटा। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें संजय गायकवाड को एक कर्मचारी को पीटते हुए साफ देखा जा सकता है। वीडियो में विधायक का गुस्से में चिल्लाना और कर्मचारी को धक्का देना साफ नजर आता है। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है। कई लोगों ने इस व्यवहार की निंदा की है और इसे सत्ता के घमंड का उदाहरण बताया है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
इस मामले पर विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। एनसीपी, कांग्रेस और मनसे नेताओं ने संजय गायकवाड की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता में होने का मतलब यह नहीं कि आम कर्मचारियों के साथ अभद्रता की जाए। आम आदमी पार्टी और कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की निष्पक्ष जांच और संजय गायकवाड के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्या बोले संजय गायकवाड?
घटना के बाद संजय गायकवाड ने मीडिया से बात करते हुए सफाई दी कि उन्होंने सिर्फ खराब भोजन को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी और किसी को जानबूझकर चोट पहुंचाने का उनका इरादा नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि “आमदार निवास जैसी जगह पर अगर बासी खाना परोसा जाएगा तो हमें आवाज तो उठानी ही पड़ेगी।” अब तक इस मामले पर आमदार निवास प्रशासन या सरकार की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। ना ही अभी तक कोई पुलिस शिकायत दर्ज होने की खबर है। इस चुप्पी पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या विधायक को बचाने की कोशिश की जा रही है? अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वायरल वीडियो के बाद सरकार या शिवसेना की ओर से कोई कार्रवाई होती है या नहीं। क्या इस घटना पर सिर्फ जुबानी माफ़ी से बात खत्म हो जाएगी या फिर कोई कड़ी कार्रवाई होगी? इससे पहले भी कुछ जनप्रतिनिधियों पर इस तरह के दुर्व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में कोई सख्त कदम उठाया गया है।




