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MSC बैंक ने स्थापित किया देश का पहला साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर, सहकारी बैंकों की मिलेगा नया कवच

State Cooperative Bank has established the country's first 'Sahakar Suraksha' cyber security operation center, digital security of cooperative banks will get a new shield

मुंबई/सुमित गायकवाड : भारत में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं पर साइबर हमले बढ़ते जा रहे हैं. बीते साल में अनेक नागरी सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों पर हुए हमलों से करोड़ों का नुकसान हो चुका है. पिछले वर्ष राज्य सहकारी बैंकों पर भी ऐसे साइबर हमले की कोशिश की गयी थी. इस पृष्ठ भूमि पर निवेशकों और खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से राज्य सहकारी बैंकों ने रिजर्व बैंक के मार्गदर्शन अनुसार वाशी मे खुद का सहकार सुरक्षा नाम से एक अत्याधुनिक साइबर सिक्युरिटी आपरेशन सेंटर (C-SOC) की स्थापना किया है. इस केंद्रki स्थापना मे 50 करोड़ का kharch आया है. आज राज्य के वित्त मंत्री अजीत दादा पवार ने इस सहकार सुरक्षा सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया. इस अवसर पर सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल, सहकार राज्य मंत्री पंकज भोयर, समेत तमाम उच्च अधिकारी मौजूद थे.

डिजिटल युग में सुरक्षा की नई पहल

भारतीय सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। ‘सहकार सुरक्षा’ नामक यह केंद्र नवी मुंबई के वाशी में राज्य सहकारी बैंक की खुद की ज़मीन पर विकसित किया गया है। यह न केवल राज्य सहकारी बैंक, बल्कि महाराष्ट्र की सभी सहकारी बैंकों और पतसंस्थाओं के लिए भी कोई लाभ न कमाते हुए सेवा उपलब्ध कराएगा। इस अत्याधुनिक केंद्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों की मदद से 24×7 निगरानी, साइबर हमले की पहचान, अलर्ट जारी करना, रिपोर्ट बनाना और सभी बैंकों की प्रणाली की रक्षा करना संभव होगा।

केंद्र के प्रमुख उद्देश्य

  • सभी सहकारी बैंकों को लक्षित और अनलक्षित साइबर खतरों से सुरक्षा देना।
  • साइबर हमलों की प्राथमिक चरण में पहचान और नियंत्रण करना।
  • डेटा चोरी, फर्जी लेनदेन और तकनीकी धोखाधड़ी को रोकना।
  • AI की सहायता से सतत निगरानी और खतरे की पूर्व चेतावनी देना।
  • बैंकों की सुरक्षा स्थिति का मूल्यांकन और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश देना।
  • रिज़र्व बैंक, नाबार्ड और केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप रिपोर्टिंग में सहायता।
  • 2447 से अधिक सहकारी बैंकों की डिजिटल प्रणाली पर लगातार नजर रखना।
  • संदिग्ध लेनदेन का विश्लेषण कर भविष्य की योजनाएं बनाना।

प्रशिक्षण और विस्तार की योजना

इस केंद्र में फिलहाल 35 तकनीकी कर्मचारी तैनात हैं, जो चौबीसों घंटे काम करेंगे। राज्य सहकारी बैंक की योजना है कि भविष्य में मांग के अनुसार इस केंद्र की क्षमता को और बढ़ाया जाए। साथ ही सभी सदस्य बैंकों के कर्मचारियों के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। सहकारी बैंकों के लिए यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, जिससे डिजिटल बैंकिंग के इस युग में ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। यह पहल सहकारी बैंकिंग के क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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