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सहकारिता क्षेत्र को मजूबत बनाएगी महाराष्ट्र सरकार, कानून में संशोधन की तैयारियां

Govt will setup committee for Co-operative Act: CM Devendra Fadnavis

मुंबई/विशेष प्रतिनिधिःमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य में सहकारी अधिनियम में सुधारों के लिए एक समिति बनाई जाएगी। इसके साथ ही, सहकारी संस्थाओं को सशक्त करने के लिए एक अलग समिति भी गठित की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जो सहकारी बैंक अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें राज्य सरकार के खाते संभालने की अनुमति दी जा सकती है। समिति के माध्यम से सहकारिता अधिनियम में आवश्यक परिवर्तन की आवश्वयकताओं का अध्ययन किया जाएगा.  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा के बाद समिति के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसका मकसद मौजूदा सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के लिए अध्ययन करना है.  महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक द्वारा आयोजित सहकारिता के सशक्तिकरण और सरकारी नीति पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा सहकारी कानून अच्छा है, यह कानून सभी प्रकार की सहकारी समितियों के लिए लगभग एक जैसा है।इसलिए नए दौर की नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

अच्छे बैंकों को मिलेगी सरकारी खातों को संभालने की जिम्मेदारी-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे रास्ते तलाशेगी, जिससे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सहकारी बैंकों को सरकारी खातों का प्रबंधन करने की अनुमति मिल सके।  मुख्यमंत्री ने कहा, “हम मौजूदा सहकारी समिति अधिनियम में बदलाव की सिफारिश करने के लिए एक समिति गठित करेंगे और मौजूदा सहकारी समितियों को मजबूत करने के तरीके पर अध्ययन करने और राज्य सरकार को सिफारिशें देने के लिए एक और समिति बनाई जाएगी।” फडणवीस ने कहा कि राज्य में लगभग 50 प्रतिशत सहकारी समितियां सहकारी आवास समितियां हैं और राज्य सरकार ने उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों में बदलाव और सुधार पेश किए हैं। फडणवीस ने कहा कि सरकार आवास क्षेत्र में स्व-पुनर्विकास परियोजनाओं का समर्थन कर रही है और स्व-पुनर्विकास के लिए जाने की इच्छा रखने वाली आवास समितियों को विभिन्न प्रकार की रियायतें और सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

सभी समितियों के लिए एकल कानून कैसे चलेगा

एक ही कानून के अंतर्गत वित्तीय सहकारी समितियां, कृषि सहकारी समितियां जैसी विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियां वर्तमान में एक ही कानून के अंतर्गत हैं। विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों के लिए कानून में अलग-अलग प्रारूप तैयार करने होंगे। इन विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों की आवश्यकताएं भी अलग-अलग हैं। इसलिए, विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए सहकारी अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक है।
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