Supreme Court on OBC | ओबीसी आरक्षण के साथ कराएं महाराष्ट्र में निकाय चुनाव, SC का निर्देश
Supreme Court on OBC Reservation | SC directs to conduct municipal elections in Maharashtra with OBC reservation

नई दिल्ली/ विशेष प्रतिनिधिः सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार (6 मई) को महाराष्ट्र राज्य में 5 वर्षों से लंबित पड़े स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा फैसला किया है. सर्वोच्च अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए ओबीसी आरक्षण के मुकदमे के कारण रुके हुए चुनावों को संपन्न कराने का निर्देश दिया है. 2022 से इस मुकदमे के कारण महाराष्ट्र की 32 महानगर पालिकाओं, नगररपालिकाओं के चुनाव नहीं हो सके हैं. कोर्ट ने कहा, “OBC समुदायों को आरक्षण कानून के अनुसार प्रदान किया जाएगा जैसा कि जेके बंठिया आयोग की 2022 की रिपोर्ट से पहले महाराष्ट्र राज्य में मौजूद था।” जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र चुनाव आयोग को 4 सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों को अधिसूचित करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को चार महीने की अवधि के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र चुनाव आयोग को जरूरत पड़ने इस समय अवधि को बढ़ाने की मांग करने की स्वतंत्रता भी दी गई है । खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव, बंठिया आयोग को चुनौती देने वाली याचिकाओं के परिणाम के अधीन होंगे.
अक्टूबर-दिसंबर 2025 के बीच हो सकते हैं लोकल चुनाव
ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि निकाय चुनाव, बंठिया आयोग को चुनौती देने वाली याचिकाओं के परिणाम के अधीन होंगे और यह आदेश पार्टियों द्वारा उठाए गए विवादों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा। जाहिर है सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, समेत राज्य की 32 महानगर पालिकाओं और नगरपालिकों के चुनाव की बाधाएं एक तरह से खत्म हो गई हैं. माना जा रहा है कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच स्थानीय निकायों के चुनाव हो जाएंगे.
बंठिया आयोग की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु:
1) राज्य सरकार ने स्थानीय स्वशासन निकायों से अनुभवजन्य डेटा प्राप्त करने के लिए 11 मार्च, 2022 को जयंतकुमार बंठिया की अध्यक्षता में एक आयोग नियुक्त किया।
2) बंठिया आयोग ने 7 जुलाई, 2022 को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपी।
3) बंठिया आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा है कि ओबीसी नागरिकों के पिछड़े वर्गों की श्रेणी में आते हैं और वे राजनीतिक रूप से पिछड़े हैं।
4) मतदाता सूची के अनुसार, सर्वेक्षण रिपोर्ट (जनगणना रिपोर्ट) के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी 37 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया था।
5) यद्यपि राज्य में कुल जनसंख्या 37 प्रतिशत दिखाई गई है, लेकिन स्थानीय स्वशासन निकायों में यह जनसंख्या अलग-अलग दिखाई गई है।
6) स्थानीय स्वशासन निकायों में जहां एससी/एसटी की आबादी 50 प्रतिशत है, वहां ओबीसी के लिए कोई आरक्षण नहीं होगा। परिणामस्वरूप गढ़चिरौली, नंदुरबार और पालघर जिला परिषदों में ओबीसी आरक्षण शून्य प्रतिशत हो जाएगा।
7) बंठिया आयोग ने सभी जगह ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की है। यह आरक्षण देते समय यह शर्त है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के सदस्यों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।



