Women’s Day | Law against obscene | फूहड़ कन्टेंट के खिलाफ कानून बनाने की मांग गरमाई
Women's Day | Law against obscene | demand for making a law against obscene content

नई दिल्लीः इंडिया गॉट लेटेंट में अश्लील कन्टेंट के प्रदर्शन से बूमरंग हो गया है. कोर्ट और कानूनी कार्रवाई शुरू हो गयी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर सरकार फूहड़ कन्टेंट परोसने वालों के खिलाफ सख्त क्यों नहीं है.आजादी के 75 साल बाद भी अश्लील कंटेंट के खिलाफ कोई भी सख्त कानून क्यों नहीं बन रहा है. दिल्ली के मशहूर वकील एड. अश्विनी उपाध्याय इसे लेकर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है कि संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी के तहत सिर्फ बोलने और लिखने की आजादी है फूहड़ता दिखाने, या परोसने की आजादी नहीं है इसलिए इसके खिलाफ निवारक कानून बनाने की जरूरत है. क्योंकि इससे भारतीय संस्कृति, आचरण और मर्यादा सब ध्वस्त हो रही है. महिला दिवस पर एड.अश्विनी उपाध्याय की यह दलील सुनने लायक है.
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महिला दिवस की विशेषता क्या है
एक लैंगिक समानता वाली दुनिया की कल्पना के बीच पक्षपात, रूढ़िवादिता और भेदभाव से मुक्त दुनिया की मांग तेज हो गयी है. एक ऐसी दुनिया जो विविधतापूर्ण, न्यायसंगत और समावेशी हो। एक ऐसी दुनिया जहाँ अंतर को महत्व दिया जाता है और उसका जश्न मनाया जाता है। इसके लिए ही महिला दिवस की स्थापना की गयी. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (IWD) सौ साल से भी ज़्यादा समय से मनाया जा रहा है, हालांकि कई मुद्दे अभी भी महिलाओं की प्रगति को प्रभावित कर रहे हैं। 1911 से, IWD उन सभी का है जो महिलाओं की समानता की परवाह करते हैं। आईए महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाएं। भेदभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। लैंगिक समानता स्थापित करने के लिए कार्रवाई करें।



