
Mahashivratri 2025 | शिवरात्रि पर सजे नवी मुंबई के शिवालय, भजन कीर्तन शुरू
Mahashivratri 2025 | Shiva temples of Navi Mumbai decorated on Shivratri, Bhajan Kirtan started
मुंबईः देवोंं के देव महादेव के पूजन अर्चन के महापर्व शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर शहर के सभी शिवालय सज गए हैं. नवी मुंबई के सबसे विशाल वाशी गांव के जागृतेश्वर शिव मंदिर को अनूठे ढंग से सजाया गया है. वहीं पुरातन शिव मंदिर पावणे गांव में भी पावणेश्वर महादेव मंदिर की रोशनाई की गई है. ऐरोली, कोपरखेरणे, वाशी, घणसौली और बेलापुर के शिव मंदिरों में भी मंगलवार की शाम से ही भक्तों का जमावड़ा शुरू हो गया है. हर हर महादेव का जयघोष और शिव सभों की ध्वनि से पूरा परिसर गुंजायमान हो रहा है.
पावणे गांव में लगता है महामेला, आते हैं लाखों लोग
नवी मुंबई के ठाणे बेलापुर रोड पर स्थित पावणे गांव में हर साल शिवरात्रि पर महामेला लगता है. यहां पावणेश्वर महादेव के पुरातन मंदिर में रात 2.30 बजे से ही भक्त दर्शन के लिए आ जाते हैं. बुधवार दिन भर यहां लाखों भक्तों का आना जाना होगा. मेला के साथ ही यहां भजन कीर्तन और महाभंडारा चलता है. वाशी के जागृतेश्वर शिव मंदिर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चहल पहल के बीच हजारों भक्त अपने भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, औऱ धतूरा दूध का अभिषेक करते हुए दर्शन करते हैं.
परम-आत्मा का ही नाम है शिव, जिसका संस्कृत अर्थ है ‘सदा कल्याणकारी’, अर्थात वो जो सभी का कल्याण करता है। शिवरात्रि व शिवजयन्ती भारत में द्वापरमहा अर्थार्थ ‘महान’, रात्रि अर्थार्थ ‘अज्ञान की रात’ और जयन्ती अर्थार्थ ‘जन्म दिवस’। परमपिता परमात्मा शिव तब आते हैं जब अज्ञान अंधकार की रात्रि प्रबल हो जाती है। परम-आत्मा का ही नाम है शिव, जिसका संस्कृत अर्थ है ‘सदा कल्याणकारी’, अर्थात वो जो सभी का कल्याण करता है
क्या है शिवरात्रि पर पूजा का महत्व
पर्व को लेकर मान्यता है कि इसी दिन शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से सुखद दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है.महा अर्थार्थ ‘महान’, रात्रि अर्थार्थ ‘अज्ञान की रात’ और जयन्ती अर्थार्थ ‘जन्म दिवस’। परमपिता परमात्मा शिव तब आते हैं जब अज्ञान अंधकार की रात्रि प्रबल हो जाती है। शिवरात्रि व शिवजयन्ती भारत में द्वापर युग से मनाई जाती है। यह दिन हम ईश्वर के इस धरा पर अवतरण के समय की याद में मनाते हैं। शिव के अलावा ओर किसी को भी हम ‘परम-आत्मा’ नहीं कहते। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर को देवता कहते है। बाकि सभी है मनुष्य। तो हम उसी निराकार परमपिता (सभी आत्माओ के रूहानी बाप) के अवतरण का यादगार दिवस मनाते है युग से मनाई जाती है। यह दिन हम ईश्वर के इस धरा पर अवतरण के समय की याद में मनाते हैं। शिव के अलावा ओर किसी को भी हम ‘परम-आत्मा’ नहीं कहते। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर को देवता कहते है। बाकि सभी है मनुष्य। तो हम उसी निराकार परमपिता (सभी आत्माओ के रूहानी बाप) के अवतरण का यादगार दिवस मनाते है



