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पेंशन विवाद: NCPA ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार

Pension dispute: NCPA appeals to the President

भिलाई:  नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ पेंशनर्स एसोसिएशंस (NCPA) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) पर उच्च वेतन के आधार पर पेंशन (PoHW) से जुड़े मामलों में कथित रूप से देरी करने और उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उचित अनुपालन नहीं करने का आरोप लगाना है। संगठन ने देश की राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) तथा छूट प्राप्त भविष्य निधि प्रतिष्ठानों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग की है। NCPA का दावा है कि इस विवाद से देशभर के दस लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक प्रभावित हो रहे हैं। संगठन की ओर से राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने जीवन के 30 से 40 वर्ष इस्पात संयंत्रों, रिफाइनरियों, खदानों और अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करते हुए बिताए। इन कर्मचारियों ने देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें उच्च वेतन के आधार पर पेंशन प्राप्त करने में कथित तौर पर अनेक प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। NCPA के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने केवल 2,000 से 5,000 रुपये तक की पेंशन मिल रही है। संगठन का आरोप है कि उच्च पेंशन से संबंधित आवेदनों के निपटारे में देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कुछ पेंशनभोगियों पर भारी ब्याज तथा जुर्माने का बोझ भी पड़ रहा है। संगठन ने दावा किया है कि कुछ मामलों में यह राशि 40,000 रुपये प्रति-माह तक पहुंच सकती है। NCPA का कहना है कि सीमित पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों के लिए ऐसी वित्तीय परिस्थितियों का सामना करना बेहद कठिन है।

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उच्चतम न्यायालय के फैसलों के अनुपालन का मुद्दा

NCPA ने अपने ज्ञापन में उच्च वेतन के आधार पर पेंशन के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व फैसलों का हवा-ला दिया है। संगठन ने विशेष रूप से आर.सी. गुप्ता मामले में 2016 के फैसले और सुनील कुमार बी. मामले में 2022 के निर्णय का उल्लेख करते हुए आरोप लगाना कि EPFO के कुछ प्रशासनिक निर्देशों और प्रक्रियाओं के कारण इन फैसलों के अनुरूप पेंशन दावों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। संगठन का दावा है कि 2022 के बाद विभिन्न उच्च न्यायालयों की पीठों ने भी इस विषय पर कई मामलों में पेंशनभोगियों के पक्ष में फैसले दिए हैं। NCPA के अनुसार, इन फैसलों के बावजूद कुछ छूट प्राप्त भविष्य निधि प्रतिष्ठानों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उच्च पेंशन के दावों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। NCPA ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि संबंधित मंत्रालय और EPFO यह सुनिश्चित करें कि न्यायालयों के फैसलों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पात्र कर्मचारियों के मामलों पर विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि पेंशन संबंधी विवादों का समाधान स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई न लड़नी पड़े।

18 जनवरी 2025 के परिपत्र पर उठाए सवाल

ज्ञापन में EPFO के 18 जनवरी 2025 को जारी परिपत्र को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। NCPA का आरोप है कि इस परिपत्र के आधार पर छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के उच्च पेंशन आवेदनों को अस्वीकार किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि पुराने आंतरिक ट्रस्ट नियमों में तकनीकी कमियों के आधार पर पेंशन दावों को खारिज करना उचित नहीं है, खास तब जब संबंधित कर्मचारी लागू कानूनी प्रावधानों के तहत अपने अधिकारों का दावा कर रहे हों। NCPA ने इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 9 जुलाई 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, इस फैसले में आंतरिक ट्रस्ट नियमों और वैधानिक प्रावधानों के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गई थीं। NCPA का आरोप है कि EPFO का संबंधित परिपत्र कानूनी सवाल खड़े करता है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। संगठन ने राष्ट्रपति से अपील की है कि संबंधित मंत्रालय और EPFO को परिपत्र की कानूनी वैधता की समीक्षा करने तथा पात्र पेंशनभोगियों के दावों पर निष्पक्ष तरीके से विचार करने के निर्देश दिए जाएं। हालांकि, परिपत्र को लेकर उठाए गए इन सवालों और आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया ज्ञापन में शामिल नहीं है।

PSU कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप

NCPA ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाना है कि अलग-अलग प्रतिष्ठानों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ उच्च पेंशन के मामलों में समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। संगठन के अनुसार, देशभर में बड़ी संख्या में उच्च पेंशन संबंधी आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन कुछ छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के आवेदन अस्वीकार किए जा रहे हैं या उनके निपटारे में बाधाएं आ रही हैं। ज्ञापन में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), नाफेड और ITI लिमिटेड जैसे प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया है। NCPA का कहना है कि एक ही श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने से असमानता की स्थिति पैदा हो सकती है। संगठन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 300A के तहत अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। उस-ने राष्ट्रपति से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि पेंशन संबंधी दावों पर फैसला करते समय कर्मचारियों के साथ समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों का पालन किया जाए।

राष्ट्रपति से तीन प्रमुख मांगें

NCPA ने राष्ट्रपति से अपने संवैधानिक और नैतिक अधिकारों के तहत संबंधित मंत्रालय तथा EPFO को आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। संगठन ने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं। पहली मांग EPFO के 18 जनवरी 2025 के विवादित परिपत्र की समीक्षा कर उसे वापस लेने की है। NCPA का मानना है कि इस परिपत्र के कारण पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों के दावों के निपटारे में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। संगठन ने मांग की है कि इस विषय पर लागू कानूनों और न्यायालयों के फैसलों के अनुरूप निर्णय लिया जाए। दूसरी मांग पेंशन से संबंधित मुकदमों की व्यापक समीक्षा करने की है। NCPA चाहता है कि उन मामलों का आकलन किया जाए जिसमें उच्च न्यायालयों के फैसलों के विरुद्ध आगे कानूनी कार्रवाई की जा रही है। संगठन ने अनावश्यक अपीलों को वापस लेने और समान परिस्थितियों वाले पेंशनभोगियों के मामलों में एक समान प्रक्रिया अपना-ने की अपील की है। तीसरी मांग प्रशासनिक देरी के कारण उत्पन्न होने वाले दंडात्मक ब्याज से राहत और उच्च वेतन के आधार पर पेंशन के संयुक्त विकल्पों का समयबद्ध निपटारा करने की है। NCPA का कहना है कि पात्रता और लागू नियमों के अनुसार मामलों पर निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

‘वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार मिलने चाहिए’: NCPA

NCPA के अध्यक्ष बी.एन. अग्रवाल ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी दान या खैरात नहीं मांग रहे हैं, बल्कि वे अपने वैधानिक अधिकारों के अनुसार पेंशन चाहते हैं। संगठन का कहना है कि जिन कर्मचारियों ने दशकों तक देश के औद्योगिक विकास में योगदान दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए। अग्रवाल ने राष्ट्रपति से इस मामले में निर्णायक हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि पेंशन विवादों का लंबे समय तक लंबित रहना वरिष्ठ नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। संगठन के अनुसार, उम्र और सीमित आय के कारण कई पेंशनभोगियों के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया में शामिल रहना कठिन हो जाता है। इसलिए पात्र मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध व्यवस्था जरूरी है। NCPA ने अपने ज्ञापन में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगठन को उम्मीद है कि राष्ट्रपति के हस्तक्षेप से श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO के स्तर पर इस विषय की समीक्षा होगी तथा प्रभावित पेंशनभोगियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, NCPA की प्रमुख मांगें उच्च वेतन के आधार पर पेंशन के पात्र दावों का निष्पक्ष निपटारा, विवादित परिपत्र की समीक्षा, अनावश्यक मुकदमेबाजी पर रोक और प्रशासनिक देरी से प्रभावित वरिष्ठ नागरिकों को राहत दिलाने से जुड़ी हैं। इस मामले में संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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