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तुर्भे कचरा परियोजना पर रोक की मांग, जांच के घेरे में मंजूरी प्रक्रिया

Demand to halt Turbhe waste project; approval process under scrutiny

नवी मुंबई: तुर्भे में प्रस्तावित एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन (ISWM) परियोजना को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ठाणे लोकसभा क्षेत्र के सांसद नरेश म्हस्के ने परियोजना की कथित कानूनी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की है। इस मामले में परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। शिकायत के बाद अब इस परियोजना पर रोक लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सांसद नरेश म्हस्के ने परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसकी मंजूरी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया की गहन समीक्षा की जानी चाहिए। उठाए गए मुद्दों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नियमों के पालन, बफर जोन की व्यवस्था, पर्यावरणीय मंजूरियों और जनसुनवाई की प्रक्रिया शामिल हैं। इसके अलावा, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

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पर्यावरणीय नियमों और मंजूरियों पर सवाल

तुर्भे में प्रस्तावित इस कचरा प्रबंधन परियोजना को लेकर पर्यावरणीय नियमों के पालन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। शिकायत में यह जांचने की मांग की गई है कि परियोजना तैयार करने और उसे मंजूरी देने के दौरान निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का उचित पालन किया गया है या नहीं। बफर जोन की व्यवस्था और आवश्यक पर्यावरणीय अनुमतियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं में पर्यावरणीय सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और आसपास के क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में परियोजना की मंजूरी से संबंधित सभी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जांच किए जाने की मांग ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, उठाए गए सवालों और कथित अनियमितताओं की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों तथा सक्षम प्राधिकरणों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

जनसुनवाई और DPR प्रक्रिया की जांच की मांग

परियोजना को लेकर जनसुनवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। मांग की गई है कि यह स्पष्ट किया जाए कि परियोजना से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई थीं या नहीं। इसके साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अपनाए गए तरीके की भी समीक्षा करने की मांग की गई है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत परियोजना की योजना और मंजूरी की प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। इस संबंध में उच्चस्तरीय जांच की मांग का उद्देश्य परियोजना से जुड़े निर्णयों, दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर स्थिति स्पष्ट करना है।

राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

सांसद नरेश म्हस्के ने राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर परियोजना को तत्काल स्थगित करने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना से जुड़े कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की समीक्षा जरूरी है। शिकायत में उठाए गए मुद्दों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग भी की गई है। इस घटनाक्रम के बाद तुर्भे ISWM परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और संबंधित प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं तथा परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया की जांच को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

क्या परियोजना पर लग सकती है रोक

परियोजना को स्थगित करने की मांग के बीच अब सभी की नजरें राज्य सरकार और महानगरपालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, फिलहाल परियोजना पर रोक लगाए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इसे लेकर किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। यदि सरकार इस मामले में जांच के आदेश देती है, तो परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय अनुमोदन, जनसुनवाई, DPR और PPP प्रक्रिया सहित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा सकती है। जांच के निष्कर्षों और संबंधित अधिकारियों के निर्णय के आधार पर ही परियोजना के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।तुर्भे कचरा परियोजना को लेकर उठे इन सवालों ने नवी मुंबई में प्रशासनिक पारदर्शिता और पर्यावरणीय नियमों के पालन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस शिकायत पर क्या निर्णय लेती है और परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

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