
पनवेल में साईं बाबा की महासमाधि का भव्य उत्सव
Grand celebration of Sai Baba’s Mahasamadhi in Panvel
पनवेल: पनवेल स्थित श्री साईं नारायण बाबा आश्रम में शिरडी के श्री साईं बाबा की 108वीं महासमाधि वर्षगांठ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। 20 अक्टूबर को आयोजित इस पावन अवसर पर स्थान की ओर से भव्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सद्गुरु श्री साईं नारायण बाबा (पूज्य गुरु) की आध्यात्मिक उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल रोककर श्री साईं बाबा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। महासमाधि उत्सव के अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों से सजाया गया था। विशेष विद्युत रोशनी से मंदिर की भव्यता और बढ़ गई। सुबह तड़के तीन बजे से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले बाबा की भूपाली और काकड़ आरती की गई। इसके बाद 108 लीटर दूध से अभिषेक और एकादशद्रव्य रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। इन अनुष्ठानों में सुगंधित तेल, पंचामृत, पंचगव्य, घी, दूध, दही, शहद, गन्ने का रस, फलों का रस, नारियल जल, विभूति, स्वर्ण मुद्राओं और चंदन जल सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों का उपयोग किया गया। अभिषेक के बाद बाबा की विधिवत अर्चना और आरती की गई। इसके पश्चात पारंपरिक पालखी यात्रा निकाली गई, जिसमें नादस्वरम की मधुर धुनों ने भक्तिमय वातावरण बनाया। स्थान के सुरक्षा कर्मचारियों ने अनुशासित और आकर्षक वर्दी में परेड प्रस्तुत की, जो कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। पूरे परिसर में भजन, आरती और धार्मिक जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
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बाबा की महासमाधि की स्मृतियों ने भावुक किए श्रद्धालु
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को श्री साईं बाबा की महासमाधि से जुड़ी घटनाओं का स्मरण कराया गया। पूज्य गुरु द्वारा पहले सुनाए गए प्रसंगों के माध्यम से भक्तों ने 15 अक्टूबर 1918 को हुई बाबा की महासमाधि की स्मृतियों को याद किया। बताया गया कि उस दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर बाबा ने शिरडी की द्वारकामाई मस्जिद में बैयाजी कोटे पाटिल की गोद में अपना नश्वर शरीर त्याग दिया था। महासमाधि से जुड़े इस भावुक प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भक्तों ने बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं और मानवता के प्रति उनके संदेश को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। महासमाधि का निर्धारित समय दोपहर 2:30 बजे विशेष रूप से मनाया गया। इस दौरान श्री साईं महिमा का पाठ किया गया और बाबा की आरती संपन्न हुई।
विश्व शांति महायज्ञ और सेवा कार्य भी हुए
महासमाधि उत्सव के दौरान स्थान में प्रति-दिन की तरह श्री विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन भी किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सेवा कार्यों को भी विशेष महत्व दिया गया। जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण किया गया और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले 100 से अधिक बच्चों को निःशुल्क दूध वितरित किया गया। स्थान की ओर से आयोजित इन सेवा गतिविधियों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाया और सेवा, करुणा तथा मानवता के संदेश को आगे बढ़ाना रहा। इस अवसर पर श्री दुर्गा माता, श्री साईं बाबा और पूज्य गुरु को 108 प्रकार के नैवेद्य प्रसाद अर्पित किए गए। यह प्रसाद श्रीमती आशा सभाचंदानी द्वारा समर्पित किया गया। दोपहर में बाबा की मध्याह्न आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद पूरे दिन मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहा। शाम को गोधूलि आरती आयोजित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से भाग लिया। श्री साईं बाबा के भजनों की प्रस्तुति विभिन्न भक्तों ने की, जो शाम छह बजे तक चलती रही। रात 8:30 बजे शेज आरती के साथ दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों का समापन हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा।

नवरात्रि और दुर्गा उत्सव भी श्रद्धापूर्वक संपन्न
श्री साईं बाबा की महासमाधि वर्षगांठ के साथ स्थान में नौ दिवसीय दुर्गा उत्सव और नवरात्रि का आयोजन भी किया गया। यह उत्सव 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चला। इन नौ दिनों के दौरान प्रति-दिन श्री देवी स्तुति का गायन और मां दुर्गा की प्रतिमा की आरती की गई। भक्तों ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मां दुर्गा की प्रतिमा स्थान को बालयोगिनी सरस्वती अम्मा की वसीयत के अनुसार प्राप्त हुई थी। सरस्वती अम्मा का 14 अप्रैल 1964 को निधन हो गया था। स्थान में इस प्रतिमा की नियमित पूजा और आरती के माध्यम से उनकी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। नवरात्रि उत्सव के पहले दिन, 11 अक्टूबर को बंगाली श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दुर्गा प्रतिपदा का आयोजन किया। इस दौरान धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आस्था का सुंदर संगम देखने को मिला। नौ दिनों तक चले उत्सव में भक्तों ने मां दुर्गा की स्तुति और आराधना में भाग लिया।
श्रद्धालुओं के प्रति स्थान ने जताया आभार
श्री साईं बाबा की 108वीं महासमाधि वर्षगांठ और दुर्गा उत्सव के सफल आयोजन पर स्थान ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। स्थान ने कहा कि भक्तों की सहभागिता और सहयोग से यह पावन अवसर श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और सेवा गतिविधियों के माध्यम से आध्यात्मिकता तथा मानव सेवा का संदेश दिया गया।
श्री साईं बाबा की महासमाधि वर्षगांठ और नौ दिवसीय दुर्गा उत्सव ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सद्भाव और सेवा के मूल्यों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।



