UPI के बड़े लेनदेन पर MDR डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम
A step towards making MDR digital payment system sustainable on UPI bulk transactions.

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़े मूल्य वाले UPI मर्चेंट लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के फैसले को भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। RBI के अनुसार, MDR से मिलने वाला राजस्व डिजिटल भुगतान से जुड़े बैंकों, पेमेंट ऐप्स और अन्य सेवा प्रदाताओं को तकनीक, बुनियादी ढांचे और पेमेंट-एक्सेप्टेंस नेटवर्क में लगातार निवेश करने में मदद कर सकता है। नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। अधिकांश पात्र लेनदेन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। हालांकि, यह व्यवस्था सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगी।
आम यूजर के लिए UPI भुगतान जारी रहेगा मुफ्त
इस व्यवस्था में Person-to-Person (P2P) UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। सरकार के ढांचे के अनुसार, उपभोक्ताओं से सीधे यह शुल्क वसूलने की अनुमति भी नहीं होगी। यानी सामान्य व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांसफर पहले की तरह शुल्कमुक्त रहेंगे।
RBI ने क्यों बताया इसे महत्वपूर्ण
RBI का कहना है कि UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पूरे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने, सुरक्षित रखने और लगातार अपग्रेड करने के लिए तकनीकी तथा परिचालन निवेश की जरूरत भी बढ़ रही है। MDR से उत्पन्न राजस्व को इस इकोसिस्टम में शामिल अलग-अलग संस्थाओं के बीच उचित तरीके से वितरित करने से तकनीकी बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, नवाचार और पेमेंट स्वीकार करने वाले नेटवर्क में निवेश को समर्थन मिल सकता है।
छोटे कारोबारियों के लिए अलग प्रावधान
नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कुछ छूट भी रखी गई है। Reuters के अनुसार, QR कोड के जरिए UPI से प्रति माह 1 लाख रुपये तक की कमाई वाले छोटे व्यापारियों को इस MDR व्यवस्था से छूट दी जाएगी। वहीं कुछ विशिष्ट क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था निर्धारित की गई है।
UPI के लिए बदलता आर्थिक मॉडल
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है। अगस्त 2026 में UPI के जरिए करीब 24.5 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। ऐसे में लेनदेन की बढ़ती मात्रा के साथ भुगतान नेटवर्क की लागत और उसके दीर्घकालीन वित्तीय मॉडल पर भी ध्यान बढ़ा है। MDR व्यवस्था का उद्देश्य इसी बढ़ते इकोसिस्टम के लिए एक ऐसा राजस्व मॉडल तैयार करना है, जिससे पेमेंट कंपनियां और बैंक लगातार तकनीकी क्षमता, सुरक्षा और भुगतान स्वीकार करने के बुनियादी ढांचे में निवेश कर सकें। हालांकि, नई व्यवस्था का व्यापारियों और डिजिटल भुगतान के व्यवहार पर वास्तविक प्रभाव इसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
- लागू होने की तारीख: 15 अक्टूबर 2026
- MDR: सामान्य पात्र बड़े P2M UPI लेनदेन पर 0.4%
- सीमा: अधिकांश लेनदेन पर अधिकतम ₹300
- P2P UPI: शुल्कमुक्त
- ग्राहक से सीधे MDR: नहीं
- उद्देश्य: डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालीन आर्थिक और तकनीकी स्थिरता
- फोकस: तकनीक, बुनियादी ढांचा, सुरक्षा और पेमेंट स्वीकार्यता का विस्तार



