नेपाल में 11 दिन बाद भी रेस्क्यू जारी,1,344 मौतें; 5 हजार लोग अब भी लापता
Rescue operations continue in Nepal 11 days after the devastation; 1,344 dead, 5,000 still missing.
काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और ग्लेशियर टूटने की घटनाओं के बाद मची तबाही का असर 11 दिन बाद भी दिखाई दे रहा है। देश के कई प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मलबे और क्षतिग्रस्त इलाकों में बचाव दल अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 1,344 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान 13 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
आपदा के बाद अब राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरामद शवों और मानव अवशेषों की पहचान करना है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद शवों में कम से कम 85 बच्चे शामिल हैं। करीब 500 शव ऐसे हैं, जिनके कुछ अंग बरामद नहीं हो सके हैं। कई शवों की स्थिति बेहद खराब होने के कारण पारंपरिक तरीकों से उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे में नेपाल पुलिस ने शवों की पहचान के लिए डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लापता लोगों के परिजनों से डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं, ताकि बरामद मानव अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से मिलान कर उनकी पहचान की जा सके।
चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
चितवन जिले में अब तक सबसे अधिक 362 शव बरामद किए गए हैं। हालांकि इनमें से अभी तक केवल 98 शवों की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं होने के कारण परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारियों के सामने चुनौती केवल शवों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लापता लोगों का पता लगाना भी अभियान का अहम हिस्सा बना हुआ है।
गोरखा में फिर बाढ़ से मची अफरा-तफरी
इस बीच नेपाल के गोरखा जिले में रविवार तड़के एक बार फिर बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। नम्रुंग खोला नदी के उफान में चार मकान और एक झूला पुल बह गया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बाढ़ के कारण दो छोटी पनबिजली परियोजनियों को भी नुकसान पहुंचा है। लगातार बदलते मौसम और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने राहत एवं बचाव एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
भारत की राहत और बचाव में बड़ी भूमिका
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान में भारत भी लगातार सहयोग कर रहा है। भारतीय बचाव दल नेपाल सेना के साथ मिलकर चिलिमे टनल में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। सुरंग के भीतर पानी, कीचड़ और भारी मलबा जमा होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत की ओर से अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। इसके अलावा 54 विशेषज्ञों की टीम भी राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई है। इस टीम में सुरंग बचाव, फॉरेंसिक और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं।
भारत ने नेपाल की जरूरतों के अनुसार आगे भी हरसंभव सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। इस बीच नेपाल में राहत अभियान के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश और शवों की पहचान का काम आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।



