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BRICS Summit 2026: रोजगार, किसान और युवाओं के लिए बड़े अवसर

BRICS Summit 2026: What’s in it for the common man? Major opportunities for employment, farmers, and the youth.

नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का फोकस ‘मानवता प्रथम’ और ‘जन-केंद्रित विकास’ जैसे मुद्दों पर है। BRICS को अक्सर वैश्विक कूटनीति और आर्थिक सहयोग के मंच के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसका बढ़ता सहयोग भारत के आम नागरिक के लिए भी कई संभावित अवसर पैदा कर सकता है। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, वित्त, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने का असर रोजगार, किसानों की आय, छोटे कारोबार, युवाओं और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ सकता है।

रोजगार और MSME क्षेत्र को मिल सकता है बढ़ावा

BRICS देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार बढ़ने से उत्पादन, निर्यात, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह, बैंकिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसका फायदा बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME क्षेत्र को भी मिल सकता है।

यदि भारतीय छोटे और मध्यम कारोबारियों की BRICS देशों की सप्लाई चेन में भागीदारी बढ़ती है, तो नए बाजार मिलने के साथ उत्पादन और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

किसानों के लिए खुल सकते हैं नए बाजार

BRICS देशों के बीच कृषि व्यापार बढ़ने से भारतीय किसानों और कृषि उत्पादकों के लिए नए बाजार उपलब्ध हो सकते हैं। फल, सब्जियां, अनाज, मसाले, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि तकनीक और बेहतर सप्लाई चेन में सहयोग किसानों को अपनी उपज के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकता है। हालांकि किसानों तक इसका वास्तविक लाभ पहुंचना बाजार व्यवस्था, निर्यात नीति और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से बेहतर हो सकती हैं सुविधाएं

BRICS का New Development Bank (NDB) सदस्य देशों में बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़क, रेलवे, जल आपूर्ति, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी परिवहन जैसी परियोजनाओं में निवेश बढ़ने से आम नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं मिलने की संभावना है।

बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने के साथ-साथ परिवहन, निर्माण सामग्री, सेवाओं और स्थानीय कारोबार में अप्रत्यक्ष रोजगार को भी बढ़ावा दे सकती हैं।

पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है फायदा

BRICS देशों के बीच पर्यटन और लोगों के आवागमन को बढ़ावा मिलने पर विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा लाभ होटल, रेस्तरां, टैक्सी, स्थानीय परिवहन, टूर ऑपरेटर, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को मिल सकता है।

भारत के पर्यटन स्थलों को BRICS देशों के पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के प्रयास स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और हरित तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग

ऊर्जा क्षेत्र BRICS सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेल और गैस के साथ-साथ सौर ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और अन्य हरित तकनीकों में सहयोग भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों और तकनीकों तक बेहतर पहुंच से भविष्य में उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और लागत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

तकनीक और डिजिटल सेक्टर में युवाओं के लिए अवसर

BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, हेल्थटेक और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी सहयोग बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और घरेलू उपकरणों जैसे क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता और बाजार प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे लंबे समय में उत्पादों की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सस्ती दवाओं की उम्मीद

भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है। BRICS देशों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से भारतीय दवा कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।

वैक्सीन, जेनेरिक दवाएं, मेडिकल डिवाइस, टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य तकनीक में सहयोग बढ़ने से विकासशील देशों में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

छात्रों और युवाओं के लिए शिक्षा और रिसर्च के अवसर

BRICS देशों के बीच शिक्षा, शोध और कौशल विकास में सहयोग भारतीय छात्रों और युवाओं के लिए नए रास्ते खोल सकता है। विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी, संयुक्त शोध परियोजनाएं, छात्र विनिमय कार्यक्रम और स्कॉलरशिप जैसी पहल बढ़ने से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और शोध के अवसर मिल सकते हैं।

स्थानीय मुद्रा और डिजिटल भुगतान से व्यापार को मिल सकती है गति

BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के विस्तार पर सहयोग सीमा-पार लेन-देन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकता है। यदि ऐसी प्रणालियां व्यापक स्तर पर अपनाई जाती हैं, तो व्यापारिक लेन-देन की लागत और प्रक्रिया को सरल बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

BRICS: कूटनीति से आगे विकास का संभावित मंच

BRICS का प्रभाव केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सीमित नहीं है। भारत के लिए यह समूह व्यापार, निवेश, रोजगार, तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास के अवसरों को आगे बढ़ाने का मंच बन सकता है।

हालांकि इन पहलों का लाभ आम नागरिक तक तुरंत पहुंचना जरूरी नहीं है। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौतों, निवेश और विकास परियोजनाओं को कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और उनका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक कैसे पहुंचता है।

कुल मिलाकर, यदि BRICS सहयोग को जन-केंद्रित नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़ा जाता है, तो इसका दीर्घकालिक लाभ रोजगार, किसानों, MSME, युवाओं, स्वास्थ्य, तकनीक और बुनियादी सुविधाओं के रूप में आम नागरिक तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि भारत की अध्यक्षता में BRICS को केवल एक कूटनीतिक समूह के बजाय विकास और जनहित से जुड़े संभावित अवसरों के मंच के रूप में भी देखा जा रहा है।

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