ऑपरेशन चक्र-6: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के खिलाफ CBI की बड़ी कार्रवाई
Operation Chakra-6: CBI's major crackdown on 'digital arrest' fraud.
नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में नागरिकों को डराकर और उनसे लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत सीबीआई ने आज देश के 20 राज्यों में 89 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच के तहत की गई है।
CBI के मुताबिक, यह अभियान उन गिरोहों के खिलाफ चलाया जा रहा है, जो पुलिस अधिकारी, केंद्रीय जांच एजेंसी, बैंक अधिकारी या अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद पीड़ितों को किसी कथित अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग, बैंक खाते या अवैध गतिविधि में शामिल होने का डर दिखाकर वीडियो कॉल या अन्य डिजिटल माध्यमों से लगातार निगरानी में रखा जाता है। इसी तरीके को आमतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम से जाना जाता है।
42 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़े मामले
CBI की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 42 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े तीन मामलों की जांच के सिलसिले में की गई। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई संदिग्ध ठिकानों की तलाशी ली और डिजिटल फ्रॉड से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया। जांच एजेंसी ने इस कार्रवाई के दौरान तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किए जाने की भी जानकारी दी है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और जांच के आगे बढ़ने के साथ डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कैसे होती है ठगी?
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक ऐसा तरीका है, जिसमें ठग पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स विभाग, बैंक या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद पीड़ित को बताया जाता है कि उसके नाम पर कोई मामला दर्ज है या उसके बैंक खाते का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। ठग पीड़ित को डराकर उसे कॉल काटने से मना करते हैं और कई बार वीडियो कॉल पर घंटों या दिनों तक जुड़े रहने के लिए मजबूर करते हैं। इसके बाद ‘जांच’, ‘वेरिफिकेशन’ या ‘सुरक्षा राशि’ के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है।
देशभर में साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर शिकंजा
‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत की गई कार्रवाई को डिजिटल फ्रॉड के संगठित नेटवर्क के खिलाफ CBI की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। एजेंसी का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क की पहचान करना, उनके वित्तीय लेन-देन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य जुटाना तथा अपराध में शामिल लोगों तक पहुंचना है।
CBI की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के खिलाफ जांच एजेंसियां अब देशव्यापी स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं। नागरिकों को भी ऐसे मामलों में सतर्क रहने और किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर बैंकिंग जानकारी या पैसे साझा नहीं करने की सलाह दी जाती है।
भारत में कोई भी वास्तविक पुलिस या जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर डराता है और पैसे की मांग करता है, तो तुरंत सतर्क होकर संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए।



