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सुप्रीमकोर्ट का बड़ा फैसला: छात्र प्रदर्शनों की सभी FIR रद्द,नई FIR पर भी रोक

Supreme Court's major ruling: All FIRs related to student protests quashed; stay on new FIRs as well.

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित FIRs को बंद करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में इन प्रदर्शनों को लेकर दर्ज FIRs को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और उनकी जांच भी नहीं की जाएगी।

यह फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश विशेष परिस्थितियों और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया जा रहा है और इसे सामान्य मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।

दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम की FIRs पर राहत

केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस के साथ बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम की ओर से भी संबंधित FIRs को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया गया था। कोर्ट ने इन आवेदनों में उल्लिखित FIRs को रद्द कर दिया और राहत का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से संबंधित कोई नई FIR किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज नहीं की जाएगी। जिन मामलों को अदालत के सामने विशेष रूप से नहीं लाया गया था, उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाने और बंद मानने का निर्देश दिया गया है।

2,873 लोगों के खिलाफ अलग FIR की अनुमति

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह सामान्य राहत दी है, लेकिन 2,873 ऐसे लोगों के मामले में अपवाद रखा गया है, जिन्हें गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया गया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इन लोगों के संबंध में एक नई FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।

दिल्ली पुलिस ने इससे पहले जुलाई में दर्ज 13 FIRs को आगे न बढ़ाने की इच्छा सुप्रीम कोर्ट के सामने जताई थी। इनमें हिंसा, दंगा और गंभीर आपराधिक धाराओं से जुड़े मामले भी शामिल थे।

NEET 2026 से जुड़े आत्महत्या मामलों में मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। केंद्र सरकार को मुआवजे के लिए देशव्यापी नीति/ढांचा तैयार करने और तीन महीने के भीतर संबंधित परिवारों को मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।

5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च रद्द

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा की। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत के समक्ष भी मार्च वापस लेने की बात कही। केंद्र सरकार के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आंदोलन को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया गया।

सरकार ने इस फैसले और मार्च वापस लेने के कदम का स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में छात्रों के भविष्य और शांतिपूर्ण विरोध में शामिल युवाओं के हित को महत्वपूर्ण आधार माना है।

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