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नेपाल बाढ़ की होगी वैज्ञानिक जांच, सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति

Scientific investigation into Nepal floods: Government forms 7-member expert committee.

काठमांडू: नेपाल सरकार ने 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस भीषण आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत, बचाव और शवों की पहचान का काम जारी है और आधिकारिक आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।

बाढ़ के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी समिति

नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय ने इस विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य सिर्फ बाढ़ के तत्काल कारणों का पता लगाना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि हिमनद, भूगर्भीय गतिविधियां, जल प्रवाह और पहाड़ी क्षेत्र की परिस्थितियां किस तरह एक-दूसरे से जुड़कर इस आपदा को इतना विनाशकारी बनाने में सहायक बनीं। समिति में जल विज्ञान, हिमनद विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, भूविज्ञान, जलविद्युत अवसंरचना और आपदा जोखिम न्यूनीकरण जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। समिति का समन्वय जल नीति एवं शासन विशेषज्ञ देवेश बेलबासे कर रहे हैं।

26 अगस्त को आखिर क्या हुआ था?

सरकार की जांच का प्रमुख सवाल यह है कि 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में अचानक इतनी विनाशकारी बाढ़ कैसे आई। विशेषज्ञ बाढ़ के स्रोत क्षेत्र से लेकर नदी के पूरे प्रभावित हिस्से तक घटनाक्रम का अध्ययन करेंगे। एक प्रारंभिक वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत दिया गया है कि यह घटना केवल अत्यधिक स्थानीय बारिश का परिणाम नहीं हो सकती। उपलब्ध अध्ययन के अनुसार बर्फ, चट्टान और मिट्टी के बड़े पैमाने पर खिसकने से नदी का प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हुआ और प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बनने के बाद उसके टूटने से अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और अवसाद नीचे की ओर बहा हो सकता है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष सरकारी विशेषज्ञ समिति की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।

क्या जलवायु परिवर्तन भी बना कारण?

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि जलवायु परिवर्तन ने इस आपदा के जोखिम या तीव्रता को बढ़ाने में कोई भूमिका निभाई थी या नहीं। समिति हिमनदों में बदलाव, पर्वतीय भूगर्भीय अस्थिरता और जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के बीच संभावित संबंधों का अध्ययन करेगी। समिति यह भी देखेगी कि हिमनदीय, भूवैज्ञानिक और जलवैज्ञानिक खतरे किस तरह एक-दूसरे से जुड़े और क्या इनका संयुक्त प्रभाव बाढ़ को अधिक विनाशकारी बनाने में महत्वपूर्ण रहा।

जलविद्युत परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे पर भी असर

26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में सड़क, पुल, बस्तियों और जलविद्युत परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के आसपास बड़े पैमाने पर मलबा जमा हुआ और कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग प्रभावित हुए।

एक महीने में प्रारंभिक रिपोर्ट

नेपाल सरकार ने विशेषज्ञ समिति को एक महीने के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। समिति की रिपोर्ट से बाढ़ के घटनाक्रम, संभावित कारणों और भविष्य में ऐसे हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम को कम करने के उपायों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस जांच का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, भूस्खलन, अचानक नदी अवरोध और तेज जलप्रवाह जैसी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़कर बड़े पैमाने पर आपदा का रूप ले सकती हैं। नेपाल सरकार अब इस आपदा के पीछे मौजूद प्राकृतिक और संभावित जलवायु-संबंधी कारकों की वैज्ञानिक तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।

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