पारसिक अवैध खनन रिपोर्ट पर NGT ने उठाए गंभीर सवाल
NGT Raises Serious Questions Regarding Illegal Mining Report in Parsik
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : नवी मुंबई के पारसिक हिल स्थित कथित अवैध खनन मामले में डायरेक्टोरेट ऑफ जियोलॉजी एंड माइंस (DGM) द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। विभाग ने 96 खदानों का सर्वे पूरा कर रिपोर्ट ठाणे जिला प्रशासन को सौंप दी, जिसे बाद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में प्रस्तुत किया गया। हालांकि अंतिम सुनवाई से पहले ही रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत वनशक्ति संस्था ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट अधूरी, भ्रामक और खदान संचालकों को लाभ पहुंचाने वाली है। संस्था का कहना है कि रिपोर्ट में अवैध खनन से हुए वास्तविक पर्यावरणीय नुकसान और सरकारी राजस्व की क्षति का सही आकलन नहीं किया गया है।
2017 में NGT ने लगाया था प्रतिबंध
वनशक्ति संस्था ने NGT में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पारसिक हिल पर स्वीकृत सीमा से बाहर बड़े पैमाने पर खनन किया गया, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। याचिका पर सुनवाई करते हुए 14 नवंबर 2017 को NGT ने पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance), स्वीकृत माइनिंग प्लान और वन विभाग की अनुमति के बिना होने वाले सभी खनन कार्यों पर रोक लगा दी थी। साथ ही ‘Polluter Pays Principle’ के तहत पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर मुआवजा वसूलने तथा विस्तृत सर्वे कराने के निर्देश दिए थे।
96 खदानों का हुआ सर्वे
NGT के आदेश के अनुपालन में वर्ष 2025 में 51 चालू खदानों का इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (ETS) तकनीक से सर्वे किया गया। इसके बाद जून 2026 में 45 बंद खदानों का संयुक्त सर्वेक्षण किया गया। पूरी रिपोर्ट 16 जुलाई को ठाणे जिला कलेक्टर को और 20 जुलाई को NGT में प्रस्तुत की गई।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार, कई खदानें पिछले 10 से 12 वर्षों से बंद हैं और वहां घनी वनस्पति विकसित हो चुकी है। इसी कारण ETS तकनीक से सटीक माप लेना संभव नहीं हो सका। विभाग ने NGT को 51 सर्वे मैप, 51 पंचनामे तथा 45 बंद खदानों के पंचनामे सौंपे हैं।
पर्यावरण संगठनों ने दावे को किया खारिज
वनशक्ति के संस्थापक डी. स्टालिन ने विभाग के इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि घनी वनस्पति का हवाला देकर अवैध खनन के वास्तविक दायरे को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, सागर शक्ति संगठन के निदेशक नंदकुमार पवार ने भी रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आधुनिक सर्वे तकनीकों का सही उपयोग किया जाता तो वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सकती थी।
क्या है पारसिक हिल खनन मामला?
वर्ष 1972 में महाराष्ट्र सरकार ने 962.13 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र CIDCO को हस्तांतरित किया था। इसमें से 138.07 हेक्टेयर भूमि खनन के लिए लीज पर दी गई थी। हालांकि विभिन्न सरकारी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि स्वीकृत क्षेत्र से बाहर 264 से 370.8 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर भी अवैध खनन किया गया। इससे कुल 508.9 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र प्रभावित होने की बात सामने आई है।
अब NGT के समक्ष इस मामले में पर्यावरणीय क्षति की भरपाई, जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई और प्रभावित क्षेत्र के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन को लेकर अंतिम निर्णय लंबित है। इस बीच, सर्वे रिपोर्ट पर उठे सवालों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।



