
जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
Emphasis on the use of modern technology in water management.
महाराष्ट्र ,पुणे: राज्य के भविष्य के जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त हुए अनुभवी अभियंताओं और अधिकारियों के लंबे अनुभव का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए जल संसाधन विभाग के साथ-साथ प्रत्येक महामंडल के स्तर पर सलाहकार मंडल गठित करने पर विचार किया जाए, यह सुझाव महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने दिया। वह यशवंतराव चव्हाण विकास एवं प्रशासन प्रबोधिनी (यशदा), पुणे में जल संसाधन विभाग की ओर से आयोजित ‘अभियंता गौरव पुरस्कार समारोह’ में संबोधित कर रहे थे। मंत्री विखे पाटील ने कहा कि महाराष्ट्र की खेती और जल व्यवस्था को मजबूत बनाने में जल संसाधन विभाग के अभियंताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विभाग के कई अनुभवी अधिकारियों और अभियंताओं ने अपने लंबे सेवाकाल के दौरान राज्य में जल प्रबंधन और सिंचाई से जुड़े बड़े स्तर पर काम किए हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवी अधिकारियों और अभियंताओं की विशेषज्ञता का लाभ सेवानिवृत्ति के बाद भी विभाग को लगातार मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से विभाग और प्रत्येक जल विकास महामंडल के स्तर पर सलाहकार मंडल बनाने की दिशा में विचार किया जाना चाहिए। इससे भविष्य की जल परियोजनाओं और जल प्रबंधन से जुड़े फैसलों में अनुभवी विशेषज्ञों की जानकारी का उपयोग किया जा सकेगा।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
राधाकृष्ण विखे पाटील ने जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में उपलब्ध आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम और कुशल उपयोग कैसे किया जा सकता है, इस पर सभी संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों में पानी का नियोजन, वितरण और उपयोग अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी तरीके से करने की जरूरत है। जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से कृषि क्षेत्र को भी अधिक मजबूती मिल सकती है।
हर महामंडल में 3 से 5 पुरस्कार देने का प्रस्ताव
कार्यक्रम के दौरान जल संसाधन विभाग में दिए जाने वाले पुरस्कारों की संख्या बढ़ाने की मांग भी सामने आई। इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री विखे पाटील ने प्रत्येक महामंडल के लिए कम से कम तीन पुरस्कार देने की सूचना दी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से प्रत्येक महामंडल के लिए तीन से पांच पुरस्कार रखने को उनकी मंजूरी है। इससे विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं और अधिकारियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उनके कार्यों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का अवसर मिलेगा।
दुष्काळमुक्त महाराष्ट्र के लिए सामूहिक प्रयास
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दुष्काळमुक्त महाराष्ट्र के संकल्प को पूरा करने के लिए जल संसाधन विभाग के सभी अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों से मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य को सूखे की समस्या से मुक्त करने के लिए जल प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और उपलब्ध जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए विभाग के सभी स्तरों पर समन्वय और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले, परियोजना समन्वय सचिव जयंत बोरकर, लाभ क्षेत्र विकास विभाग के सचिव प्रकाश मिसाळ, विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक राजेश सोनटक्के, कृष्णा घाटी विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक हनुमंत धुमाळ, गोदावरी घाटी विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक जयंत गवळी, कोंकण सिंचाई विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक सुदर्शन पगार और तापी घाटी विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक राजेश मोरे सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जलसंपदा विभाग के सेवानिवृत्त अभियंताओं और अधिकारियों के अनुभव का उपयोग करने के लिए सलाहकार मंडल बनाने का सुझाव राज्य के भविष्य के जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, पानी के अधिक कुशल उपयोग और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर देते हुए विभाग ने दुष्काळमुक्त महाराष्ट्र के लक्ष्य की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता जताई है। साथ ही, प्रत्येक महामंडल में 3 से 5 पुरस्कार देने की पहल से विभाग के अभियंताओं और अधिकारियों के उल्लेखनीय कार्यों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।



