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भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक नेतृत्व की ओर

India's Wind Energy Sector Poised for Global Leadership

गोवा/प्रतिनिधि : गोवा में आयोजित ग्लोबल विंड डे सम्मेलन 2026 के दौरान केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेज प्रगति विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि देश का पवन ऊर्जा क्षेत्र नवाचार, निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर वैश्विक नेतृत्व के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि गोवा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल विंड डे समारोह की मेजबानी राज्य की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए गोवा सरकार की सराहना भी की।

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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत की पवन टरबाइन निर्माण क्षमता 10 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 24 गीगावाट हो गई है। वहीं वर्ष 2025-26 में देश ने एक वर्ष में 6 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा कि पवन ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा प्रणाली की विश्वसनीयता का भी महत्वपूर्ण आधार बन रही है। भारत ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य तय किया है। जोशी के अनुसार, देश ने कुल स्थापित बिजली क्षमता में 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया है, जो स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धि है।

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