
‘वंदे मातरम’ से गूंजा नवी मुंबई मनपा मुख्यालय, 150वीं वर्षगांठ पर सामूहिक गायन
'Vande Mataram' sung by Navi Mumbai Municipal Corporation, 150th Anniversary Mass Singing
नवी मुंबई-प्रतिनिधिः ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर आज नवी मुंबई के मनपा मुख्यालय में सामूहिक गान की गूंज सुनाई दी. केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ गीत के गायन की अधिसूचना जारी की गई थी जिसके अनुसार मनपा आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे के मार्गदर्शन में, मनपा मुख्यालय के एम्फीथिएटर में ‘वंदे मातरम’ गीत का सामूहिक गायन किया गया. मनपा के सभी स्कूलों और कॉलेजों में वंदे मातरम का यह सामूहिक गान हुआ। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘वंदे मातरम’ का सीधा प्रसारण भी मनपा मुख्यालय स्थित एम्फीथिएटर में एलईडी स्क्रीन पर दिखाया गया.भारतीय जनमानस में देशप्रेम एवं देशभक्ति जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम’ गीत के सामूहिक गायन ने देशभक्ति से परिपूर्ण वातावरण का निर्माण किया।इस अवसर पर अपर आयुक्त श्री सुनील पवार, विभिन्न विभागाध्यक्ष, अधिकारी, कर्मचारीगण तथा डीपीएस स्कूल, नेरुल और एसएस स्कूल, नेरुल के स्काउट गाइड छात्र एवं शिक्षकगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
स्वतंत्रता आंदोलन का नारा रहा है वंदे मातरम
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में वर्णित ‘वंदे मातरम’ गीत 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के दिन लिखा गया माना जाता है और स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही यह हर भारतीय का नारा रहा है। 1896 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार ‘वंदे मातरम’ गाया था और बाद में यह स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक प्रेरणादायक गीत बन गया। ‘वंदे मातरम’ आज़ाद हिंद सेना की घोषणा के दौरान गाया गया था। 1905 में, ‘वंदे मातरम’ बंगाल विभाजन के विरोध का मंत्र था। 1907 में, मैडम भीकाजी कामा ने बर्लिन में भारत के बाहर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया और उस पर ‘वंदे मातरम’ लिखवाया। 24 जनवरी 1950 को, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में यह स्थापित किया कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा प्राप्त है। इस प्रकार, ‘वंदे मातरम’ प्रत्येक भारतीय की अंतरात्मा की आवाज़ बन गया।



