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रायगढ़ Congress जिलाध्यक्ष ने परप्रांतीयों के खिलाफ उगला जहर-मचा बवाल

Congress Leader Mahendra Gharat Criticizes migrants, Urges Project-Affected Locals to Unite

नवी मुंबई/प्रतिनिधिः कांग्रेस के रायगड़ जिलाध्यक्ष महेंद्र घरत के एक बयान ने राजनीति गरमा दी है. मनसे की तर्ज पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने भी परप्रांतियों के खिलाफ जहर उगला है, और प्रकल्पग्रस्तों को भड़काते हुए उनसे सावधान रहने पर जोर दिया है. पनवेल के धुतुम ग्राम पंचायत में एक क्रिकेट टर्फ और साकव पुल का उद्घाटन करते हुए महेंद्र घरत ने कहा कि “भूमिपुत्रों जाग जाओ! परप्रांतीय आएंगे, झोपड़ियाँ बनाएंगे और बड़े हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपनी बढ़ती ज़रूरतों के अनुसार घर बनाने का हक है। हमारी पीढ़ियाँ यहां पली-बढ़ी हैं, इसलिए इस भूमि पर रहना हमारा अधिकार है.

हमारी जमीन छीनकर परप्रांतियों को दे रही ‘सरकार-महेंद्र घरत

कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ का नारा देने वाली पार्टी के रायगड़ जिलाध्यक्ष महेंद्र घरत यहीं पर नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि “सिडको और अन्य संस्थाओं ने भूमिपुत्रों की सैकड़ों एकड़ चराई भूमि हड़प ली है। परंतु जब भूमिपुत्र अपनी आवश्यकताओं के अनुसार छोटे-छोटे घर बनाते हैं, तो उन्हें अवैध कहकर तोड़ा जाता है,  यह अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा, “कल को जब परप्रांतीय आकर झोपड़ियाँ बनाएंगे, तो वही सरकार उन्हें अधिकृत घोषित कर देगी, यही आज का इतिहास है। इसलिए भूमिपुत्रों को समय रहते जागना होगा।

घरत, प्रकल्पग्रस्तों को भड़काकर अपना उल्लू साध रहे हैं-हेमंत सिंह

कांग्रेस नेता का बयान ऐसे समय में आया है जब महानगर पालिका के चुनाव नजदीक हैं. उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए परप्रांतीय संगठन हिंदीभाषी विकास महासंघ ने कहा कि महेंद्र घरत चुनावी फायदे के लिए प्रकल्पग्रस्तों को परप्रांतियों के खिलाफ भड़का रहे हैं. महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत सिंह ने सवाल पूछा कि महेंद्र घरत बताएं कि रायगड़ जिले में कितने परप्रांतियों ने प्रकल्पग्रस्तों की जमीनों पर कब्जा किया है. उन्हें प्रकल्पग्रस्तों को यह भी बताना चाहिए कि आखिर उन जैसे नेताओं के पास सैकड़ों एकड़ जमीन कहां से आयी और वह जमीन पहले किसकी थी..महासंघ नेता ने यह भी पूछा कि यदि परप्रांतीय प्रकल्पग्रस्तों की जमीन झोपड़ी बनाकर हड़प रहे थे तब कांग्रेस नेता कहां थे.  हिंदीभाषी नेताओं ने कहा कि घरत मनसे की राह पर चलते हुए मराठी समुदाय को भड़काना चाहते हैं और अपनी चोरी और गलती छुपाने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए प्रकल्पग्रस्तों को सावधान रहना चाहिए.

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