
बुंदेलखंड में दीपोत्सव: आदिवासियों ने लठ-मोरपंख संग दिखाया जंगली नृत्य, गोवर्धन पूजा की परंपरा निभाई
Diwali in Bundelkhand: Tribal Lath-Mor Pankh Dance Stuns
बुंदेलखंड, बांदा: दीपोत्सव के दूसरे दिन बुंदेलखंड में आदिवासी समुदाय ने अपनी पारंपरिक परंपरा के तहत जंगली नृत्य का आयोजन किया, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस नृत्य में आदिवासी लठ और मोरपंख लेकर विशेष वेशभूषा में सज-धजकर हिस्सा लेते हैं। कुछ लोग इसे गोवर्धन पूजा के रूप में मनाते हैं, जबकि कई इसे अपने परिवार और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के रूप में निभाते हैं। सुबह से मौन व्रत रखने के बाद, शाम को लोग अज्ञात भाषा में गीत गाते हैं और ढोल की ताल पर गोलाकार में पशु नृत्य करते हैं, जिससे नृत्य में जीवंतता और उत्साह बढ़ जाता है। बांदा जिले के राम प्रसाद और सत्यम सहित सैकड़ों लोग शीतला माता मंदिर और गंगा नदी के किनारे पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। इसके बाद कई लोग मृग की वेशभूषा पहनकर कमर में घुंघरू बांधते हैं और एक मुखिया के नेतृत्व में ढोल की ताल पर जंगली नृत्य करते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में पूरी भक्ति के साथ निभाई जा रही है। आदिवासी समुदाय इसे सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को जीवित रखने का एक माध्यम मानता है, जिससे हर वर्ष दीपोत्सव की रौनक और भी बढ़ जाती है।



