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क्या रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत? अमेरिका को भारत ने दे दिया करारा जवाब

Will India stop buying oil from Russia? India gave a befitting reply to America.

Trump on India-Russia oil trade: अमेरिका-रूस के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं, अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से किसी भी तरह से पेट्रोलियम तेल न खरीदे. इसी कड़ी में, व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मलेशिया में प्रधानमंत्री मोदी के साथ संभावित मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘हां, जरूर, वह मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘वह एक महान व्यक्ति हैं. वह ट्रंप से प्यार करते हैं. मैंने वर्षों से भारत को देखा है. यह एक अविश्वसनीय देश है, और हर साल एक नया नेता आता है. मेरा मतलब है, कुछ नेता कुछ महीनों के लिए ही वहां रहते हैं, और यह साल दर साल होता रहा है. और मेरे दोस्त लंबे समय से वहां हैं.’

ट्रंप का चौंकाने वाला बयान
इस बीच रूस से तेल खरीदने को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप का चौंकाने वाला बयान सामने आया. उन्होंने दावा किया कि उन्हें “आश्वासन” दिया गया है कि भारत, रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह समझते हैं कि ऐसा ‘तुरंत’ नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने आज मुझे आश्वासन दिया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. इसे तुरंत नहीं किया जा सकता है. यह एक छोटी सी प्रक्रिया है, लेकिन यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी, और हम राष्ट्रपति पुतिन से बस यही चाहते हैं कि वे युद्ध रोकें.’

उन्होंने कहा, “कुछ ही समय में, वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे, और युद्ध समाप्त होने के बाद वे फिर से रूस से तेल का व्यापार करेंगे.” इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह चीन पर भी ‘ऐसा ही करने’ का दबाव डालेंगे. हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूसी तेल खरीदना शुरू किया है, जबकि चीन मास्को का सबसे बड़ा ऊर्जा खरीदार है.

भारत  ने दिया करारा जवाब
इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘भारत तेल और गैस का एक महत्वपूर्ण आयातक है. अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है. हमारी आयात नीतियां पूरी तरह इसी उद्देश्य से निर्देशित होती हैं. स्थिर ऊर्जा मूल्य और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारी ऊर्जा नीति के दोहरे लक्ष्य रहे हैं. इसमें हमारी ऊर्जा स्रोतों का व्यापक आधार बनाना और बाजार की स्थितियों के अनुरूप विविधीकरण करना शामिल है.

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